बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के 1.50 लाख आवेदनकर्ताओं के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। यह वे आवेदनकर्ता हैं जिन्हें इस योजना के तहत घर बनाने के लिए सरकार की तरफ से राशि मुहैया कराई गई थी और इन्होंने अपने मकान नहीं बनाए। ऐसे में नोटिस जारी कर सरकार की तरफ से जवाब मांगे जा रहे हैं।
डेढ़ लाख लोगों को भेजा गया नोटिस
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 6 लाख 21 हजार पीएम आवासों को मंजूरी मिली है। इसमें 2.38 लाख लाभार्थियों को पहली किश्त जारी भी हो गई है। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में बताया कि 1.50 लाख से अधिक लाभार्थियों ने उनके बैंक खातों में राशि जमा होने के बावजूद पक्के मकान नहीं बनाए हैं या निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया है।
श्रवण कुमार के अनुसार कुल 82 हजार, 441 लाभार्थियों को 'व्हाइट नोटिस' दिया गया है। व्हाइट नोटिस विभाग की एक चेतावनी है,जो पक्के मकान बनाने को लेकर है। 67 हजार, 733 लाभार्थियों को 'रेड नोटिस' जारी किया गया है। जो कई चेतावनियों के बाद भी मकान न बनाने की कार्रवाई को लेकर है। जो लोग रेड नोटिस के बाद भी बाज नहीं आते, उनके खिलाफ 'सर्टिफिकेट केस' दर्ज किया जाता है। विभाग ने उन 19 हजार, 495 लोगों के खिलाफ 'सर्टिफिकेट केस' दर्ज किया है। यानी 19 हजार, 495 लोगों ने योजना के तहत कई महीने पहले दी गई सारी किश्तों और उसके बाद चेतावनियों के बावजूद मकान नहीं बनाए हैं।
अप्रैल 2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बुनियादी सुविधाओं के साथ कम से कम 25 वर्ग मीटर के पक्के मकान उपलब्ध कराए जाते हैं। इस योजना में मकान बनाने के लिए लाभार्थी को 1 लाख,20 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। ये राशि मैदानी क्षेत्रों के लिए है। पहाड़ी क्षेत्रों में ये राशि 1 लाख, 30 हजार रुपये प्रति इकाई है। जिसका 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार की तरफ से और शेष 40 फीसद राज्य सरकार देती है।
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधानसभा में यह जानकारी दी कि बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत चल रहे सर्वे में अब तक 38 लाख, 98 हजार ऐसे परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिनके पास पक्का मकान नहीं है।
