बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी महागठबंधन ने नीतीश सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। रोजगार, पलायन, संविदा बहाली, कानून-व्यवस्था और वेतन असमानता जैसे मुद्दों को लेकर महागठबंधन लगातार एनडीए सरकार को घेर रहा है। महागठबंधन की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने 12 जून को राज्य के 25 जिलों में "नौकरी दो या सत्ता छोड़ो" नाम से बड़ा आंदोलन करने की घोषणा की है। इस आंदोलन में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और राष्ट्रीय नेता राज्य के विभिन्न रोजगार कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस करेगी आंदोलन
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इस दौरान नीतीश सरकार से पांच अहम सवाल पूछे हैं कि रिक्त पदों की बहाली कब होगी? पेपर लीक की जांच का क्या हुआ? संविदा कर्मियों को स्थायी कब बनाया जाएगा? समान काम के लिए समान वेतन कब मिलेगा? और पलायन की समस्या का समाधान कब होगा? इसी दिन, 12 जून को महागठबंधन की चौथी बैठक भी तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी। राजेश राम ने एनडीए के 11 साल के शासन को बिहार और देश के लिए "विनाशकारी" बताया और केंद्र की मोदी सरकार को किसान, दलित, मजदूर, महिला और गरीब विरोधी करार दिया।
वहीं, महागठबंधन की एक अन्य प्रमुख पार्टी भाकपा (CPI) ने 9 जुलाई को केंद्रीय मजदूर संगठनों द्वारा घोषित आम हड़ताल को समर्थन देने का निर्णय लिया है। पटना में आयोजित भाकपा की राज्य कार्यकारिणी बैठक में चुनाव तैयारियों सहित विभिन्न जन मुद्दों पर चर्चा की गई।
