सीपीए जोन-III सम्मेलन में डिजिटल शासन और नागरिक सहभागिता को मिली प्राथमिकता, ओम बिरला ने दिया जोर

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विधानमंडलों की सशक्त भूमिका और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी जवाबदेही को रेखांकित किया। कोहिमा में आयोजित सीपीए भारत क्षेत्र, जोन-III सम्मेलन में उन्होंने डिजिटल नवाचार, पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन का उद्देश्य विधानसभाओं को अधिक प्रभावशाली, समावेशी और कुशल बनाना है।

Om Birla CPA Zone III Conference: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे विधायी संस्थाओं के सुचारू और व्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करके उनकी गरिमा बनाए रखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र शांतिपूर्ण, सुनियोजित और सूचनाप्रद चर्चाओं के माध्यम से मुद्दों को उठाने, चिंताएँ व्यक्त करने और बहस में शामिल होने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। कोहिमा स्थित नागालैंड विधानसभा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए), भारत क्षेत्र, ज़ोन-III के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, उन्होंने आगाह किया कि सुनियोजित व्यवधान न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करते हैं, बल्कि नागरिकों को सार्थक विचार-विमर्श और जवाबदेही से भी वंचित करते हैं। 1 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाले संसद के आगामी शीतकालीन सत्र का उल्लेख करते हुए, बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शी शासन और कल्याणकारी नीति निर्माण के लिए विधानमंडलों को अधिक सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। इस वर्ष के सम्मेलन का विषय है “नीति, प्रगति और नागरिक: परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में विधायिका।” बिरला ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन के दौरान सार्थक विचार-विमर्श से पूर्वोत्तर की विधायिकाओं को अधिक सशक्त, जवाबदेह और कुशल बनाने के उद्देश्य से ठोस कार्य योजनाएं तैयार होंगी।

Lok Sabha Speaker Om Birla (Photo: ANI)

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फोटो: ANI)

नीति निर्माण में नागरिकों की आवाज

इससे पहले, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र, जोन-III सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, अध्यक्ष ने यह ज़ोर दिया कि विधानमंडलों को जनमत को नीति में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। ओम बिरला ने कहा कि विधानमंडलों का दायित्व केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लोगों की आकांक्षाओं और सरोकारों को कार्यान्वयन योग्य नीतियों में बदलना भी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि व्यापक विकास केवल सक्रिय जनभागीदारी से ही संभव है, और सच्ची प्रगति तब होती है जब नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं। इसलिए जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नीति निर्माण में नागरिकों की आवाज सार्थक रूप से प्रतिबिंबित हो। अध्यक्ष ने लोकतंत्र को नागरिकों के निकट लाने में नई तकनीकों और नवाचारों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अधिकांश विधानमंडल अब पेपरलेस बन गए हैं और डिजिटल प्रणालियों को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लोग लोकतंत्र की नींव हैं और संविधान-निर्माताओं ने इसी सिद्धांत को सर्वोपरि रखा। उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक शासन का आधार होना चाहिए। ओम बिरला ने सभी विधायी निकायों से आग्रह किया कि वे विधायी प्रक्रिया में व्यापक जन भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करें, नागरिक-अनुकूल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराएँ और बेहतर पहुँच सुनिश्चित करने के लिए समुचित तंत्र विकसित करें। उन्होंने आगे कहा, "जब किसी राज्य में जनमत नीति का आधार बनता है, तो वह राज्य निरंतर और सतत विकास प्राप्त करता है।"

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