नोएडा: एमपी टू रास्ते पर स्थित एलिवेटेड रोड अब पूरी तरह आधुनिक सीसीटीवी कैमरों से लैस हो गई है। यहां अलग-अलग जगहों पर 15 कैमरे लगाए गए हैं। अब इन कैमरों में गाड़ियों के नंबर प्लेट के साथ उसमें सवार ड्राइवर और लोगों के चेहरे भी कैद होंगे। इन कैमरों के जरिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले और अपराध करने वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसा जाएगा। अगले दो-तीन दिन में इनके जरिए निगरानी का काम शुरू हो जाएगा।
एलिवेटेड रोड पर लागए गए सीसीटीवी कैमरे
यह एलिवेटेड सड़क सेक्टर- 18 से शुरू होकर सेक्टर-60 अंडरपास तक बनी हुई है। यह शहर की एकमात्र एलिवेटेड सड़क है। इसी सड़क के जरिए काफी संख्या में लोग दिल्ली और गाजियाबाद के बीच भी आते-जाते हैं। यहां से रोजाना करीब डेढ़ से पौने दो लाख गाड़ियों का आना-जाना होता है। अब तक एलिवेटेड सड़क के बीचोंबीच एएनपीआर कैमरे लगे थे। इन कैमरों के जरिए सिर्फ गति सीमा तोड़ने वाले वाहनों के चालान हो रहा था।
एलिवेटेड रोड पर सर्विलांस कैमरे
अब पुलिस ने अपराध करने वालों पर भी शिकंजा कसने के लिए सर्विलांस कैमरे लगवाने का फैसला लिया है। पुलिस ने कैमरे लगाने के लिए जगहों का चुनाव भी कर इसकी सूची नोएडा प्राधिकरण को भेज दी है। नोएडा प्राधिकरण ने टेंडर जारी कर अब इन स्थानों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखने का फैसला लिया है।
15 कैमरों पर पैनी नजर
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने का कहना है कि यहां पर 15 नए कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे इस्कॉन मंदिर के सामने उतरने वाले लूप और एनटीपीसी के सामने चढ़ने वाले लूप, सेक्टर-27 की तरफ एलिवेटेड सड़क पर चढ़ते समय, सेक्टर-61 के सामने एलिवेटेड पर चढ़ते समय, सेक्टर-31 की तरफ चढ़ने वाले लूप और सेक्टर-25 की तरफ उतरने वाले लूप और एलिवेटेड के बीचोंबीच कैमरे लगा दिए गए हैं। यहां अब तक जो कैमरे लगे हुए थे, उन्हें सेक्टर-94 में बने इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा। जिससे पूरे एलिवेटेड सड़क की निगरानी कमांड कंट्रोल सेंटर से होगी।
गाड़ियों के साथ चालक भी होगा कैद
मंगलवार को इन कैमरों को लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि एएनपीआर के जरिए यातायात नियम तोड़ने वाले गाड़ी चालकों के चालान होंगे, जबकि सर्विलांस कैमरों के जरिए अपराध कर भागने वाले लोगों के चेहरे और गाड़ी की भी पहचान हो भी सकेगी। यातायात व्यवस्था पर भी लाइव निगरानी रखी जा सकेगी। कैमरे लगाने के बाद टेस्टिंग का काम शुरू कर दिया गया है। दो-तीन दिन में सॉफ्टवेयर तैयार होते ही इनके जरिए निगरानी शुरू हो जाएगी।
