Delhi World Book Fair 2026 : राष्ट्रीय राजधानी में 53वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला शनिवार को भारत मंडपम में 'भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान @75' थीम के साथ शुरू हुआ, जिसमें 35 से ज़्यादा देशों के 1000 प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं। अपने इतिहास में पहली बार सभी के लिए मुफ्त प्रवेश के साथ यह पुस्तक मेला अपनी मुख्य थीम के रूप में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की वीरता और ज्ञान का सम्मान कर रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए इसे ‘चर्चाओं का उत्सव और रचनात्मकता का जश्न’ बताया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क़तर के संस्कृति मंत्री HE Abdulrahman Bin Hamad Bin Jassim Bin Al Thani, स्पेन के संस्कृति मंत्री HE Ernest Urtasun Domènech तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का उद्घाटन किया। विश्व का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला (#NDWBF2026) विचारों के संगम के साथ भारत की सशक्त रीडिंग कल्चर का विराट उत्सव है।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का शुभारंभ
13 भाषाओं में मिलेगी कुडोपाली की गाथा
यह पुस्तक बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम, उर्दू सहित 9 भारतीय भाषाओं तथा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा (स्पेनिश) में जारी की गई। इससे पूर्व यह कृति हिंदी, अंग्रेज़ी और ओड़िया में प्रकाशित हो चुकी थी। अब यह पुस्तक कुल 13 भाषाओं में उपलब्ध है। यह प्रयास वीर सुरेंद्र साईं जी और कुडोपाली के शहीदों की स्मृति को सम्मानित करने के साथ भारत की बहुभाषी और वैश्विक संवाद परंपरा को सुदृढ़ करता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 आकार और प्रभाव दोनों दृष्टिकोणों से भारत की साहित्यिक जागरूकता का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 3000 से ज़्यादा स्टॉल, 1000 से ज़्यादा प्रकाशक और 600 से ज़्यादा साहित्यिक और संपादकीय कार्यक्रमों के साथ, यह दिखाता है कि यह सिर्फ़ एक पुस्तक मेला नहीं है, बल्कि विचारों का संगम और रचनात्मकता का उत्सव है। यह पहली बार है जब थीम पवेलियन की कुछ मुख्य विशेषताओं में अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि और बडगाम 1947 से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों पर सत्रों को शामिल किया गया है।
20 लाख से ज़्यादा लोगों के आने की संभावना
यह नौ दिवसीय पुस्तक मेला, 10 से 18 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 35 से ज़्यादा देशों के 1000 से ज़्यादा प्रकाशक एक साथ आएंगे। इसमें लगभग 1000 वक्ताओं के साथ लगभग 600 साहित्यिक गतिविधियां होंगी और उम्मीद है कि यह ‘20 लाख से ज़्यादा आगंतुकों को आकर्षित करेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत पुस्तक प्रकाशन क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है, जो ‘‘हमारी ज्ञान प्रणाली की व्यापकता, हमारी भाषाओं और संस्कृतियों की विविधता’’ को दर्शाता है। यह भारत की आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है, जहां हम अपनी संस्कृति की ताकत से भारतीय साहित्य को दुनिया के सामने ला सकते हैं।’’ इस मेले में पीयूष मिश्रा, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, कैलाश सत्यार्थी, रिकी केज, जया किशोरी, दुर्जोय दत्ता, शालिनी पासी और शुभांशु शुक्ला सहित लेखक, वक्ता और जानी-मानी हस्तियाँ शामिल होंगी।
इस बार, अतिथि देश कतर और फोकस देश स्पेन है। स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमेनेच ने कहा कि पुस्तक मेले में सहयोग भारत-स्पेन द्विपक्षीय सहयोग का हिस्सा है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को अभिव्यक्त करता है। जब लोग बोल नहीं पाते, तो किताबें बोलती हैं। इसीलिए हमें उनकी ज़रूरत है। स्पेनिश मंत्री ने कहा, ’’हमें पढ़ने के साझा अनुभव को बढ़ाने और वर्तमान समय में इसे विकसित करने में मदद करने की ज़रूरत है। पुस्तक मेले में रूस, जापान, पोलैंड, फ्रांस, अबू धाबी, ईरान, कजाकिस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से ज़्यादा देशों के प्रकाशक, लेखक और सांस्कृतिक संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। इंटरनेशनल पवेलियन में पुस्तकों के विमोचन, बहुभाषी कविता शाम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के साहित्य सत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गेमिंग, माइग्रेशन और विरासत जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इस साल के पुस्तक मेले में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें 10 इंटरनेशनल बुक फेयर के डायरेक्टर हिस्सा लेंगे, जैसे लीपज़िग बुक फेयर, बोलोग्ना चिल्ड्रन्स बुक फेयर, सियोल इंटरनेशनल बुक फेयर और तुर्किये के तुयाप फेयर्स एंड एग्जीबिशन आदि।
