Maharashtra News: महाराष्ट्र के पालघर जिले के आदिवासी बहुल मोखाडा तालुका से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक दंपति को अपने मृत नवजात शिशु को प्लास्टिक की थैली में रखकर 70 किलोमीटर की यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह घटना 13 जून की रात की है। जानकारी के मुताबिक, जब मोखाडा की रहने वाली गर्भवती महिला अविता सखाराम कवर को रात करीब 3 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन सुबह 12 बजे तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। लाचार परिवार ने तब खुद निजी वाहन से महिला को खोडाला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
पालघर में एंबुलेंस सेवा नाकाम
स्वास्थ्य केंद्र में समय पर इलाज न मिलने के कारण महिला को आगे इलाज के लिए नासिक रेफर किया गया, लेकिन नासिक के अस्पताल पहुंचने से पहले ही गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। घर लौटने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था फिर नहीं हो सकी, जिससे मजबूर परिवार को मृत नवजात को प्लास्टिक की थैली में रखकर घर लौटना पड़ा। यह दर्दनाक घटना आदिवासी क्षेत्रों विशेष रूप से मोखाडा-जव्हार जैसे इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली की एक और कड़वी तस्वीर पेश करती है।
इस घटना पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के पूर्व विधायक सुनील भुसारा ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में 108 एंबुलेंस सेवा अक्सर समय पर नहीं पहुंचती, जिससे लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। वहीं, पालघर स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि गर्भवती महिला की नियमित जांच की जाती रही थी और शिशु की गर्भ में मृत्यु की जानकारी विभाग को थी। लेकिन मृत शिशु को प्लास्टिक की थैली में ले जाने की घटना की उन्हें जानकारी नहीं थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में कोई स्पष्ट जवाबदेही लेने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है।
