Mumbai Pollution: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों वायु प्रदूषण (Air Pollution) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिसने नागरिकों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर समुद्र से आने वाली हवाओं को प्रदूषकों को फैलाने में मददगार माना जाता है, लेकिन इस बार मुंबई में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी ऊपर दर्ज किया गया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को हालात को ‘इमरजेंसी’ बताते हुए नगर निगम, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। निर्माण गतिविधियों, धीमी हवाओं, गर्मी और कचरा जलाने जैसी वजहों से शहर की हवा प्रभावित हो रही है। ऐसे में सवाल है कि समुद्र के किनारे बसा मुंबई प्रदूषण से क्यों जूझ रहा है और अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर क्यों दिख रहा है? आइए समझते हैं।
दिल्ली से ज्यादा मुंबई में हवा क्यों हुई जहरीली? (सांकेतिक फोटो)
धीमी हवाएं और गर्म मौसम प्रदूषण क्यों बढ़ा रहे हैं?
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, वायुमंडलीय वैज्ञानिक गुफरान बेग ने बताया कि मुंबई में इस साल अल नीनो जैसा जलवायु पैटर्न देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से हवा की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। साथ ही मौसम भी गर्म और उमस भरा बना हुआ है। जब हवा तेजी से नहीं चलती, तो प्रदूषक वातावरण में आसानी से फैल नहीं पाते और निचली वायुमंडलीय परतों में जमा होने लगते हैं। अक्टूबर में मुंबई ने सामान्य से काफी ज्यादा तापमान वाले दिन भी देखे। कुछ दिनों में अधिकतम तापमान मौसमी औसत से 4-5 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। बारिश की कमी और मानसून के जल्द विदा होने को भी बिगड़ती एयर क्वालिटी से जोड़ा गया है।
तेज धूप और अधिक तापमान जमीन के पास ओजोन बनने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा दे सकते हैं। यह ओजोन नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की सूर्य के प्रकाश में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से बनती है। ऊपरी वायुमंडल की ओजोन परत के उलट, जमीन के पास मौजूद ओजोन वायु प्रदूषक है।
निर्माण कार्य और कचरा जलाने से कितना बढ़ रहा प्रदूषण?
मुंबई में इमारतों के निर्माण और पुनर्विकास के काम भी प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। खुदाई, तोड़फोड़, निर्माण सामग्री की ढुलाई, मलबा हटाने और निर्माण स्थलों पर वाहनों की आवाजाही से धूल हवा में फैलती है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने निर्माण स्थलों पर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए रियल-टाइम एयर क्वालिटी सेंसर, बिल्डरों को अनुपालन नोटिस और 28 बिंदुओं वाले दिशा-निर्देश लागू किए हैं। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वार्ड स्तर पर निगरानी दल भी तैनात किए गए हैं। प्रदूषण तय सीमा से अधिक रहने पर निर्माण या औद्योगिक गतिविधियां रोकने की चेतावनी भी दी गई है।
कचरा और प्लास्टिक जलाना भी प्रदूषण की समस्या को गंभीर बनाता है। न्यूज 18 के अनुसार, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि कचरा जलाने से पैदा हुआ प्रदूषण केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता। हवा के साथ प्रदूषक दूसरे इलाकों में भी पहुंच सकते हैं। इसी वजह से देवनार में कचरा जलने का प्रभाव आसपास के चेंबूर और कुर्ला जैसे इलाकों की हवा पर भी देखने को मिल सकता है।
मुंबई की रैंकिंग दिल्ली से ऊपर, लेकिन आंकड़े अलग क्यों?
IQAir की रैंकिंग में मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 152 दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली का AQI 151 रिकॉर्ड हुआ। इस आधार पर मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में पांचवें और दिल्ली छठे स्थान पर थी। वहीं, कोलकाता का AQI 124 दर्ज किया गया। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े इससे अलग थे। CPCB के अनुसार, मुंबई का AQI 21 अक्टूबर को 98 था, जबकि 19 अक्टूबर को यह 114 दर्ज किया गया था।
इस अंतर की वजह आंकड़े जुटाने और उनका औसत निकालने के तरीके हैं। निजी निगरानी प्लेटफॉर्म प्रति घंटे के आंकड़ों और सरकारी स्टेशनों के साथ अन्य सेंसर के डेटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे प्रदूषण में अचानक आए बदलाव जल्दी दिखाई दे सकते हैं। सरकारी स्टेशन तय स्थानों पर आसपास की हवा की गुणवत्ता मापते हैं। इसलिए अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों की सीधे तुलना करना भ्रामक हो सकता है। मुंबई में भी प्रदूषण समान नहीं है। 16 अक्टूबर को शहर के 23 सक्रिय निगरानी स्टेशनों में से 12 ने संतोषजनक हवा दर्ज की थी। वहीं, देवनार में AQI 156, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में 145 और भांडुप के खिंडीपाड़ा में 129 रिकॉर्ड किया गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मुंबई की बिगड़ती हवा पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने नागरिक और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की कार्रवाई की धीमी गति पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा, "यह चौंकाने वाला है। शहर में समुद्री हवाएं चलती हैं, खुले स्थान हैं, फिर भी हम इस स्थिति का सामना कर रहे हैं, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुंबई का आसमान साफ रहे।" अदालत ने निर्माण स्थलों पर ढिलाई बरतने और नियमों का पालन न करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि सुबह की सैर मुश्किल हो गई है और स्मॉग बहुत खतरनाक रूप ले चुका है।
व्यस्त सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर फोड़े जा रहे पटाखों पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि 15-20 मिनट की खुशी के लिए लोग हवा में जहर घोल रहे हैं। कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे पुलिस स्टेशनों के प्रभारियों के साथ बैठक कर उल्लंघन से निपटने के लिए एक सख्त एसओपी (SOP) तैयार करें।
