भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण गुजरात में सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने हाल ही में बताया कि अहमदाबाद जिले के कैडिला फ्लाईओवर पर 11वें स्टील ब्रिज का सफलतापूर्वक इंस्टाल किया। 70 मीटर लंबे इस पुल का वजन 670 मीट्रिक टन है। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में 11वें स्टील ब्रिज का गुजरात में सफरलापूर्वक शुभारंभ हुआ
यह उपलब्धि इस महत्वकांक्षी परियोजना की प्रगति को दर्शाती है, खासकर गुजरात में, जहां कुल 28 नियोजित स्टील ब्रिज में से 17 का निर्माण होना है। बता दें कि इसमें से 11वें पुल का सफलतापूर्वक इंस्टाल किया गया। इस पुल का शुभारंभ भारत के पहले बुलेट ट्रेन नेटवर्क को वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।
ट्रेलरों के माध्यम से पहुंचाया गया 670 मीट्रिक टन का पुल
यह नया स्टील पुल आधुनिक इंजीनियरिंग एक श्रेष्ठ उदाहरण है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह 670 मीट्रिक टन का पुल 13 मीटर ऊंचा और 14.1 मीटर चौड़ा है। बता दें कि इसका निर्माण गुजरात के नवसारी स्थित एक विशेष कार्यशाला में किया गया था, जिसे बाद में भारी-भरकम ट्रेलरों के माध्यम से निर्माण स्थल तक लाया गया।
पुल को कैडिला फ्लाईओवर के ऊपर और भारतीय रेलवे की पटरियों के पास जमीन से 16.5 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है। इसके निर्माण में लगभग 29,300 टोर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ (TTHS) बोल्ट का उपयोग किया गया। पुल की स्थायित्व और दीर्घायु (Durability and Longevity) सुनिश्चित करने के लिए, इसे अच्छी क्वालिटी वाली C5 सिस्टम पेंटिंग से कोट किया गया है, जो कठोर से कठोर मौसम की परिस्थितियों का सामना करने में सहायक होगी।
कॉरिडोर में गुजरात की भूमिका
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए गुजरात में बना 11वां स्टील पुल एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक (Structural) जोड़ है। इस परियोजना के लिए कुल 28 स्टील पुलों की योजना बनाई गई है, जिनमें से 17 पुलों का निर्माण गुजरात में और शेष 11 का निर्माण महाराष्ट्र में किया जाएगा। गुजरात में इतनी बड़ी संख्या में पुलों का निर्माण, देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना को साकार करने में राज्य की केंद्रीय और निर्णायक भूमिका को उजागर करता है। पुलों के सफल और व्यवस्थित लॉन्च से स्पष्ट होता है कि परियोजना सही ट्रैक पर है। निर्माण कार्य फुल स्विंग में आगे बढ़ रहा है।
