MP Voter List Revision: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देशों पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Electoral Roll Revision) का काम शुरू कर दिया गया है। विशेष रूप से एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और सीजेपी (CJP) जैसे संगठनों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद यह कदम उठाया गया है।
मध्य प्रदेश में फिर से शुरू हुआ मतदाता सूची का पुनिरीक्षण (फाइल फोटो)
आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल होने से वंचित न रहे और जिनके नाम किसी कारणवश गलत तरीके से कट गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ा जा सके। इस अभियान के तहत पूरे मध्य प्रदेश के 71,930 बूथों पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर डोर-टू-डोर सर्वे कर रहे हैं।
गलत कटे नामों को दोबारा शामिल करने का काम
इस प्रक्रिया में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं का नाम जोड़ने, पते या विवरण में संशोधन करने और फॉर्म-6 के माध्यम से छूटे हुए या गलत कटे नामों को दोबारा शामिल करने का काम किया जा रहा है। इस विशाल कार्य में 71,930 बीएलओ, 532 एईआरओ, 230 ईआरओ और 55 डीईओ की तैनाती की गई है, जिन्हें एसआईआर प्रक्रिया की दोबारा गहन जांच करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस प्रक्रिया पर उठाए सवाल
हालांकि, इस प्रशासनिक कवायद के शुरू होते ही प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस ने इस पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां हुई हैं और अब भारतीय जनता पार्टी इस अभियान के जरिए अपने कार्यकर्ताओं के नाम गलत तरीके से जुड़वाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
भाजपा का पलटवार
दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उस पर कड़ा पलटवार किया है। बीजेपी विधायक हजारीलाल दांगी ने कहा कि कांग्रेस की हमेशा से यह पुरानी आदत रही है कि जब वह चुनाव जीतती है, तब सब कुछ ठीक रहता है, लेकिन हार मिलते ही वह सारा ठीकरा ईवीएम और चुनाव आयोग पर फोड़ देती है।
दांगी ने जोर देकर कहा कि गलत तरीके से कटे हुए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और कांग्रेस को बिना वजह ऐसे विरोध से बचना चाहिए जिससे देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचे। फिलहाल, सियासी तकरार के बीच आयोग अपनी मतदाता सूची को दुरुस्त करने में जुटा हुआ है।
