MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल में इस समय बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। यहां बारिश के साथ ही संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मलेरिया, टायफाइड, डायरिया और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियों के कई मामले सामने आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में 8 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमें भेजकर जांच और इलाज शुरू किया है। लेकिन बीमारी से लड़ाई के बीच अंधविश्वास और झाड़-फूंक भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं।
बालाघाट में मलेरिया-डायरिया समेत कई बीमारियों का प्रकोप
इन गावों के लोग बीमारियों से जूझ रहे
जानकारी के अनुसार, बीमारी के मामले मछुरदा, अडोरी, बोंदारी, कोरका और कुंडेकसा समेत बैगा बहुल गांवों से सामने आए हैं। कुंडेकसा में स्थिति को देखते हुए सरकारी स्कूल में अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। मेडिकल टीमें लोगों की जांच के लिए गांव-गांव जा रही हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल भी भेजा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
बीमारी के बीच अंधविश्वास भी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सामने अंधविश्वास भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। कुछ ग्रामीण बीमारी को देवी-देवताओं का प्रकोप मानते हैं। इस कारण ये लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और पंडा-पुजारी का सहारा लेते हैं। बीमारी ठीक करने के नाम पर मुर्गों की बलि दिए जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।
स्वास्थ्यकर्मी बीमारों का इलाज करने के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक भी कर रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि बुखार, दस्त, कमजोरी या संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई देने पर झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचें।
96 बच्चे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे
बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 96 बच्चों को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल बैहर और जिला अस्पताल बालाघाट में भर्ती कराया गया। इनमें 51 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, जबकि 45 बच्चों का इलाज अभी जारी है।
दो महीने में 8 बच्चों की बीमारी के कारण मौत की खबर से इलाके में चिंता बढ़ गई है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने प्रभावित गांवों का दौरा कर विशेष टास्क फोर्स बनाने और मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में कैंप लगाकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
