इंदौर : शिक्षक दिवस के अवसर पर इंदौर के सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में विशेष कार्यक्रम ‘एजुकेशन डायलॉग’ का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए प्रदेश भर से आए 200 से अधिक युवा अधिकारियों—जिनमें जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और शिक्षक शामिल थे—से सीधा संवाद किया और उन्हें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
सीएम डॉ. मोहन यादव
पारंपरिक शासकीय बैठकों से अलग यह आयोजन खुले विचार-विमर्श, मैदानी अनुभवों और नवाचारों को साझा करने का मंच बना। मुख्यमंत्री ने युवा अधिकारियों से उनकी चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उनके दृष्टिकोण को जाना। चर्चा के दौरान युवा शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों और शालाओं में चलाए जा रहे नए प्रयोगों की जानकारी दी, जिनमें क्लासरूम में इंटरेक्टिव पैनल का उपयोग, मोबाइल एप से छात्रों की अटेंडेंस, सीसीटीवी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और सीएसआर (CSR) के जरिए किए जा रहे नवाचार शामिल हैं।
हर जिले में 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम का लक्ष्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासन ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवा प्रशासनिक शक्ति को सीधे मैदानी नेतृत्व सौंपा है। युवा अधिकारियों की तकनीकी समझ और नई सोच शिक्षा व्यवस्था की पुरानी समस्याओं का समाधान खोजने में बेहद मददगार है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनकी पहली प्राथमिकता 'कोई भी बच्चा पीछे न रहे' होनी चाहिए। सीएम ने प्रत्येक अधिकारी को अपने जिले का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक रखने का लक्ष्य दिया और इसके लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने को कहा। उन्होंने कहा कि तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा की जाए और ऐसी शिक्षण प्रक्रिया अपनाई जाए जिससे बच्चे केवल पढ़ें नहीं, बल्कि सवाल पूछें और समस्याओं का समाधान खोज सकें।
राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के जिन विद्यालयों के पास पक्के भवन नहीं हैं, उन्हें पक्के भवन बनाकर दिए जाएंगे और स्कूलों को बस सुविधा से भी जोड़ा जाएगा।
करियर काउंसलिंग करें और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ें
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों के साथ परिवार के सदस्य जैसा आत्मीय व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में व्यापक बदलाव के माध्यम बने। यदि पारिवारिक कारणों से कोई बच्चा स्कूल छोड़ता है, तो उसे ओपन स्कूल जैसे विकल्पों की जानकारी देकर पढ़ाई जारी रखने में मदद करें। शिक्षकों को करियर काउंसलिंग करने, खासकर बेटियों को मेडिकल क्षेत्र में संभावनाओं के बारे में बताने की सलाह दी गई। साथ ही, शिक्षकों से कहा गया कि वे विद्यार्थियों के परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनकी सामाजिक-आर्थिक तरक्की का मार्ग प्रशस्त करें। उन्होंने युवा अधिकारियों और शिक्षकों को अपने नवाचारों को सोशल मीडिया के जरिए साझा करने के लिए भी प्रेरित किया।
शिक्षा विभाग में 28 वर्ष की औसत आयु वाले युवा नेतृत्व की शुरुआत
मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में युवा अधिकारियों को मैदानी स्तर पर कमान सौंपी गई है। प्रदेश में लगभग 40 नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), 23 जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और लगभग 60 विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) तैनात किए गए हैं, जिनकी औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह युवा शक्ति केवल प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने के लिए नहीं, बल्कि परिणामोन्मुखी नेतृत्व करने और स्थानीय समस्याओं के स्थानीय समाधान विकसित करने के लिए उतरी है। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की निगरानी से आगे बढ़कर सफल नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू करने की अपेक्षा जताई।
