Monsoon 2026: देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और वाराणसी में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि कई स्कूलों को बंद करना पड़ा है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी सीमा पार कर गया है और बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों का सहारा लिया जा रहा है। उत्तराखंड के देहरादून में सैलाब की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हुई है, वहीं नैनीताल और बागेश्वर में स्कूल बंद किए गए हैं। पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के चलते कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। वहीं, असम के गुवाहाटी में बारिश के बीच दो भूस्खलनों में एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की जान चली गई।
मानसून ने मचाया हाहाकार (AI फोटो)
लखीमपुर खीरी और वाराणसी में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और वाराणसी जिलों में लगातार बारिश के कारण भारी जलभराव हो गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस कारण मंगलवार को आठवीं कक्षा तक के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। लखीमपुर खीरी में लगातार बारिश के कारण खासकर ग्रामीण इलाकों में जलभराव हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) प्रवीण तिवारी ने सोमवार देर रात जारी आदेश में भारी बारिश, जलभराव और आगे भी बारिश की संभावना को देखते हुए मंगलवार को कक्षा आठ तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से मैलानी-नानपारा रेलखंड पर ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि भीरा और पलिया कलां रेलवे स्टेशनों के बीच मैलानी-नानपारा मीटरगेज रेलखंड पर पानी का रिसाव हो गया है। इसके चलते मैलानी, बिछिया और नानपारा के बीच चलने वाली करीब आधा दर्जन ट्रेनों की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। निघासन तहसील के तिकुनिया क्षेत्र में मोहना और करनाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
नदी किनारे क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही
अधिकारियों के अनुसार, दोनों नदियां नेपाल से निकलती हैं और इनके जलस्तर में वृद्धि से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाकों सहित खीरी के कई सीमावर्ती गांव प्रभावित होते हैं। तिकुनिया क्षेत्र के जसनगर गांव में मोहना और करनाली नदियां गिरिजा बैराज के दाहिने प्रवाह बांध के करीब और समानांतर बह रही हैं। इसके मद्देनजर सिंचाई विभाग ने बाढ़ नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, मंगलवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.28 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से ऊपर है। खतरे का निशान 71.262 मीटर है। वाराणसी में गंगा का अब तक का उच्चतम जलस्तर 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। आयोग के अनुसार, नदी का जलस्तर 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, सुबह और दोपहर में हुई बारिश के कारण नदी का प्रवाह और बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों की कई गलियों में अब नावों का परिचालन किया जा रहा है। पारंपरिक दाह संस्कार क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर शवों का अंतिम संस्कार गलियों और छतों पर भी किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने कहा कि गंगा के बढ़ते जलस्तर और वरुणा नदी के किनारे के क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वरुणा के किनारे जलभराव से प्रभावित कई परिवारों को एहतियात के तौर पर पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ राहत शिविरों में भेज दिया गया था।
उत्तराखंड के नैनीताल और बागेश्वर में स्कूल बंद
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में तेज सैलाब की चपेट में आने से दो कारें बह गईं। इस हादसे में एक छात्र और एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं, मांडूवाला-कांसवाला-सौड़ा मार्ग पर बरसाती नदी के तेज बहाव से एक पुल का हिस्सा ढह गया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। दूसरे पुल पर भी भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया। पौंधा क्षेत्र में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद गुलेटा नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी पार करने की कोशिश कर रही दो कारें तेज बहाव की चपेट में आ गईं और बहते हुए काफी दूर तक चली गईं। बाद में दोनों वाहन मलबे में दबे मिले। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम ने रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया, लेकिन तब तक कारों में सवार एक छात्र और एक छात्रा की जान जा चुकी थी। हादसे में तीन अन्य लोगों को बचा लिया गया। वहीं, मांडूवाला-कांसवाला-सौड़ा मार्ग पर बरसाती नदी का बहाव इतना तेज रहा कि एक पुल का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। दूसरे पुल पर भी भारी मलबा जमा होने से रास्ता प्रभावित हुआ। इस वजह से क्षेत्र में आवाजाही पर असर पड़ा है। बाड़वाला इलाके में भी बारिश के बाद जंगल से आए तेज पानी ने तबाही मचा दी। बरसाती नाले में आए सैलाब से खेतों को काफी नुकसान पहुंचा। इसके अलावा एक गैस एजेंसी परिसर में पानी भरने से उसकी बाउंड्री वॉल भी ढह गई। इलाके में जलभराव के चलते बाढ़ जैसे हालात बन गए। इसके अलावा नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। एहतियात के तौर पर दोनों जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है।
कोलकाता और दक्षिण बंगाल में भारी बारिश
पश्चिम बंगाल के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण मंगलवार सुबह राज्य की राजधानी और दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों में भारी बारिश हुई। निचले इलाकों में जलभराव के चलते सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और कार्यालय जाने के समय यातायात व्यवस्था चरमरा गई। मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कलाइकुंडा में मंगलवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 51 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई। इस दौरान कोलकाता में 23 मिमी और पड़ोसी साल्ट लेक में 40 मिमी बारिश हुई। IMD के अनुसार, अन्य स्थानों में पानागढ़ में 50 मिमी, बैरकपुर में 43 मिमी, कैनिंग में 44 मिमी और हल्दिया में 30 मिमी बारिश दर्ज की गई। दिन चढ़ने के साथ बारिश की तीव्रता बढ़ गई, जिससे निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर जलभराव हो गया। इसके कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई और प्रमुख सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा हो गई। इस बीच, राज्य के तटीय क्षेत्र के ऊपर बना कम दबाव वाला क्षेत्र लगभग स्थिर बना हुआ है। भारी बारिश का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, कार्यालय जाने वालों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ा। शहर और आसपास के जिलों के कई हिस्सों में सड़कों पर पानी जमा हो गया। मौसम विभाग ने बुधवार सुबह तक पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी क्षेत्रों में कुछ जगह भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। पश्चिम बंगाल, इससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना स्पष्ट कम दबाव वाला क्षेत्र अभी भी उसी स्थान पर बना हुआ है, जिसके कारण सोमवार रात से भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने बताया कि यह कम दबाव वाला क्षेत्र बुधवार सुबह तक पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ सकता है। मौसम कार्यालय ने चार सितंबर तक उप-हिमालयी जिलों दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
असम में भूस्खलन से एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत 4 की मौत
वहीं असम के गुवाहाटी में मंगलवार को भूस्खलन की दो अलग-अलग घटनाओं में एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार तड़के से लगातार बारिश होने के कारण ही संभवत: भूस्खलन की ये दोनों घटनाएं हुईं है। बारिश की वजह से शहर के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अधिकारियों ने बताया कि शहर के मथघारिया इलाके में हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब परिवार के सदस्य अपने घर में सो रहे थे। उन्होंने कहा, "भूस्खलन में एक दंपति और उनकी बेटी की मौत हो गई। शवों को मलबे से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।" अधिकारी ने बताया कि दंपति के 19 वर्षीय बेटे बिपलब को मलबे से सुरक्षित निकाला गया और उसे गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। एएसडीएमए के अनुसार, मृतकों की पहचान नगेन राजबोंगशी (50), उनकी पत्नी सोनू राजबोंगशी (38) और उनकी बेटी कराबी राजबोंगशी (11) के रूप में हुई है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नगेन दिहाड़ी मजदूरी करता था और गत कई वर्षों से अपने परिवार के साथ इस इलाके में रह रहा था। उनके अनुसार, यह घटना सुबह करीब आठ बजे हुई, जब भूस्खलन के कारण मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "लड़के का सिर एक ड्रम के भीतर फंस जाने के कारण उसकी जान बच गई। ड्रम की वजह से वह भूस्खलन के सीधे और बड़े प्रभाव से बच सका।" बिपलब एक निजी कंपनी में काम करता है, जबकि इस हादसे में जान गंवाने वाली उसकी बहन पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। घटना के बाद मौके पर पहुंचे दिमोरिया के विधायक तपन दास ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। दास ने कहा, "यह बेहद दुखद घटना है। हम शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जीवित बचे युवक को नियमानुसार हर संभव सहायता मिले।" विधायक ने बताया कि क्षेत्र के अन्य मकानों के खतरे का भी आकलन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। एएसडीएमए के अधिकारियों ने बताया कि सातगांव इलाके में हुए एक अन्य भूस्खलन में 65 वर्षीय महिला की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, चट्टान गिरने से महिला का घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया जिससे मृतका के परिवार के कुछ सदस्यों को मामूली चोटें आईं। उन्होंने बताया कि महिला अपने पति, बेटे और बहू के साथ रहती थी। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण गुवाहाटी के पंजाबाड़ी, आरजी बरुआ मार्ग, चांदमारी, बेलतोला, बोरबाड़ी और सिक्स माइल समेत शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया।
