'संघ को समझना है तो इसे भीतर से अनुभव करना आवश्यक'; संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कुटुंब प्रबोधन पर दिया जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस)के शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने "कुटुंब प्रबोधन"(परिवारिक जागृति) के महत्व पर भी प्रकाश डाला। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि परिवारों को सार्थक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने संस्कृति, उसके मूल्यों,नैतिकता और सही आचरण को संघ की मूल नींव बताया है। उन्होंने कहा कि इसे समझने के लिए,व्यक्ति को इसे भीतर से अनुभव करना होगा। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायाधीशों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अपने संबोधन में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि एक स्वस्थ और मजबूत समाज के निर्माण के लिए नैतिक मूल्यों,अनुशासित आचरण, सांस्कृतिक आधार और प्रतिबद्ध प्रयास का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण आवश्यक है।

Mohan Bhagwat

मोहन भागवत, सरसंघचालक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस)के शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने "कुटुंब प्रबोधन"(परिवारिक जागृति) के महत्व पर भी प्रकाश डाला। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि परिवारों को सार्थक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि घरों में दिल से दिल की बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए जहां बच्चे सही और गलत के बीच अंतर करना सीखें।

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