मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है। साल 2015 में एक युवक सुशील एक किशोरी को भगा ले गया था। बाद में किशोरी ने सुशील पर उसके साथ रेप का आरोप लगाया। किशोरी के आरोपों के बाद सुशील को पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद सुशील अगले लगभग 4 साल जेल में रहा और 2019 में उसे जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद सुशील की मौत हो गई, कम से कम कागजों में तो यही सच्चाई दिखाई गई।
'मरने' के 6 साल बाद पकड़ा गया सुशील
जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी सुशील गायब हो गया और उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। बाद में उसने खुद को मृत बताकर कोर्ट में डेथ सर्टिफिकेट पेश किया। हालांकि, उसकी मौत नहीं हुई, उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जी डेथ सर्टिफिकेट जमा करवाया था।
कोर्ट में डेथ सर्टिफिकेट जमा करवाने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पहचान बदल ली। उसने एक सिख युवक का भेष धारण कर लिया और चिनहट इलाके में शटरिंग का काम करने लगा। यहां तक कि उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए परिवार से भी नाता तोड़ लिया था।
लेकिन कानून के लंबे हाथ आखिरकार 6 साल बाद उस तक पहुंच ही गए। सुशील उर्फ रमेश उर्फ सोनू पाठक को पुलिस ने चिनहट के इंदिरानगर से गिरफ्त में लिया।
