Lucknow News: यूपी में बढ़ी आपदा प्रबंधन में MBA की मांग, जानिए इसके पीछे का पूरा साइंस और होने वाले फायदे

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  • Updated Dec 31, 2023, 12:25 PM IST

Lucknow News: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विवि के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता ने बताया कि चाहे खेती हो या जल आपूर्ति, जो भी प्राकृतिक संसाधन से जुड़े जितने भी सेक्टर हैं, सब पर जलवायु परिवर्तन का असर आ रहा है।

MBA in Disaster Management: वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के असर को हर कोई महसूस कर रहा है। मौसम की अनिश्चितता और चरम घटनाओं में बढ़ोतरी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यही वजह है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना मौजूदा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, देश में सर्वाधिक जलवायु जोन वाला राज्य है। ऐसे में प्रदेश में अब एक नये स्तर की विशेषज्ञता की मांग बढ़ने लगी है। महामारी, बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, वज्रपात जैसी आपदाओं से निपटने के लिए दक्ष लोगों की मांग को देखते हुए युवा अब क्लाइमेट रेजिलिएंट और डिजास्टर मैनेजमेंट एनालिटिक्स के क्षेत्र में अपना करियर तलाशने लगे हैं। इस क्षेत्र में एमबीए की डिमांड सबसे ज्यादा है, जो ना सिर्फ रोजगार के नये अवसरों का सृजन करेगा, बल्कि प्रदेश के अंदर बड़ी संख्या में नौकरियां भी मिल सकेंगी।

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लखनऊ समाचार।

'प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते दौर में ये जरूरी'

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विवि के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता ने बताया कि चाहे खेती हो या जल आपूर्ति, जो भी प्राकृतिक संसाधन से जुड़े जितने भी सेक्टर हैं, सब पर जलवायु परिवर्तन का असर आ रहा है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, इसके पिघलने से बड़े-बड़े लेक बन रहे हैं। हिमालय पर लेक के बर्स्ट होने से अचानक बाढ़ का खतरा बन जा रहा है। अचानक प्रवाह बढ़ जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाकों में क्लाउड बर्स्ट होता है, अब मैदानी इलाकों में भी क्लाउड बर्स्ट हो रहा है, जिससे प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती जा रही है। चाहे वो साइक्लोन हो या फिर सूखा, सब अचानक हो रहा है। इन सबके लिए हमें एक ऐसे ट्रेन्ड रिसोर्सेज या स्किल्ड मैनपावर की जरूरत है जो इन समस्याओं को नीति नियोजन में ला सके।

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