'ऑपरेशन कायाकल्प' ने कैसे बदल दी यूपी के प्राइमरी स्कूलों की सूरत, जानें योगी सरकार के इस अनूठे मॉडल के बारे में

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Feb 24, 2024, 09:56 AM IST

How Operation Kayakalp is Transforming Primary Schools Of UP: जून 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत के सबसे बड़े अन्तर्विभागीय कनवर्जन्स प्रोग्राम में से एक ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत अब तक प्रत्येक जनपद में बड़े पैमाने पर स्कूलों का कायाकल्प किया जा चुका है।

लखनऊ। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ यूपी के मुख्‍यमंत्री के रूप में सात साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इन सात वर्षों में योगी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर औद्योगिक विकास की दिशा में कई सराहनीय कदम उठाए गए हैं। प्रदेश की प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्‍यवस्था को दुरुस्‍त करने के ल‍िहाज से भी योगी सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बता दें कि उत्‍तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के ल‍िए योगी आदित्‍यनाथ सरकार ऑपरेशन कायाकल्प योजना चला रही है। इस योजना के तहत यूपी के प्राइमरी स्‍कूलों को आकर्षक बनाया जा रहा है। जून 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने भारत के सबसे बड़े अन्तर्विभागीय कनवर्जन्स प्रोग्राम में से एक ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत अब तक प्रत्येक जनपद में बड़े पैमाने पर स्कूलों का कायाकल्प किया जा चुका है।

Operation Kayakalp In Uttar Pradesh

Operation Kayakalp In Uttar Pradesh

19 आधारभूत सुविधाओं में सुधार कर बड़े पैमाने पर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 5 स्टार श्रेणी युक्त बनाकर इन्हे आदर्श विद्यालय एवं ग्राम सभा के सबसे आदर्श भवन के रूप में विकसित किया जा चुका है। इस क्रम में दिव्यांग सुलभता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। योजना के तहत रंग रोगन से लेकर मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्‍त किया जा रहा है, साथ स्‍कूल परिसर में पौधे रोपकर हरियाली भरा माहौल बनाया जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का विकास करना सरकार का लक्ष्‍य बताया जा रहा है। कायाकल्प के बाद इन विद्यालयों छात्रों की संख्या में भी रिकार्ड वृद्धि हुई है। CM योगी के ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की चर्चा अन्य राज्यों में भी होने लगी है। कई राज्य सरकारें इस मॉडल को अपने यहां अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

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