कर्नाटक में जातिवार सामाजिक-सैक्षणिक सर्वेक्षण की तैयारियां पूरी; 1.75 लाख कर्मी करेंगे 7 करोड़ लोगों का आंकलन

कर्नाटक में सोमवार से सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण की शुरुआत हो रही है, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य राज्य की जातिगत संरचना और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में मामूली देरी और जातीय सूची को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है।

Karnataka Survey 2025: कर्नाटक में सोमवार से शुरू हो रहे सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य राज्य में विभिन्न जातियों और समुदायों की जनसंख्या का सटीक आंकलन करना है, ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और संख्या बल को समझा जा सके। यह प्रक्रिया ‘जातिवार गणना’ के रूप में भी जानी जाती है।

Karnataka Prepares for Socio-Educational Survey (Symbolic Photo: Canva)

कर्नाटक सामाजिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण की तैयारी (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)

1.75 लाख कर्मचारी लेंगे भाग

हालांकि, बेंगलुरु महानगर क्षेत्र के कुछ नए नगर निकायों में, जहां हाल ही में पांच निकाय गठित किए गए हैं, वहां अधिकारियों की मांग पर प्रशिक्षण और तैयारियों के चलते सर्वेक्षण की शुरुआत में एक-दो दिन की देरी संभव है। यह सर्वेक्षण कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की देखरेख में 7 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें करीब 1.75 लाख कर्मचारी भाग लेंगे, जिनमें अधिकतर सरकारी स्कूलों के शिक्षक होंगे। ये कर्मचारी राज्य भर में लगभग 2 करोड़ परिवारों से जुड़े करीब 7 करोड़ लोगों की जानकारी एकत्र करेंगे।

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