Kalpeshwar Temple: जोशीमठ के पास है पंच केदार सर्किट का यह मंदिर, जिसके कपाट बारहों महीने खुले रहते हैं

भोलेनाथ के दर्शनों के लिए पंच केदारों में से एक कल्पेश्वर मंदिर की यात्रा अत्यंत पावन मानी जाती है। उत्तराखंड की उर्गम घाटी में स्थित यह मंदिर भोले की जटाओं को समर्पित है। जोशीमठ से होकर यहां पहुंचा जाता है। मंदिर सालभर खुला रहता है, लेकिन मई से अक्टूबर का समय यात्रा हेतु श्रेष्ठ है।

KEY HIGHLIGHTS
  • स्थान और ऊंचाई – यह मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र की उर्गम घाटी में, समुद्र तल से 7217 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
  • यात्रा मार्ग – जोशीमठ से हेलंग होते हुए सागर गांव और फिर उर्गम गांव तक सड़क मार्ग से पहुँच सकते हैं, इसके बाद एक छोटा ट्रैक कर मंदिर पहुंचा जाता है।
  • दर्शन का समय – मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है और शाम 7 बजे आरती के बाद बंद हो जाता है; मई से अक्टूबर के बीच का समय दर्शन हेतु सर्वोत्तम माना जाता है।

Kalpeshwar Temple: सावन का महीना शुरू हो चुका है और हर तरफ बोल-बम के नारे गूंजने लगे हैं। रंग-बिरंगी कांवड़ लेकर कांवड़िए हर तरफ नजर आने लगे हैं। सावन के महीने में शिव भक्त शिवाला-शिवाला जाकर भगवान भोले भंडारी का आशीर्वाद लेते हैं। हर तरफ शिव मंदिरों में इन दिनों भोले के भक्तों का रेला है। आप भी अपने शहर में भोले भंडारी को खुश करने के लिए एक लोटा जल लेकर पहुंच रहे होंगे। इस सावन आप अपने शहर के शिवालों में भगवान को जल अर्पित करें, हम आपको ले चलते हैं भोले भंडारी के कुछ बहुत ही मशहूर मंदिरों की सैर पर। आज सैर उस मंदिर की जहां पर भोले बाबा की जटाओं की पूजा होती है। जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा... तो चलिए कल्पेश्वर मंदिर के दर्शनों के लिए जो पंच केदारों में से एक है।

Kalpeshwar-5th Kedar.

साल भर खुले रहते हैं कल्पेश्वर मंदिर के कपाट

हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ अपनी इस यात्रा की शुरुआत करें। यात्रा की शुरुआत में ही बता दें कि पंच केदारों में से सिर्फ कल्पेश्वर ही ऐसे हैं, जिनके कपाट बारहों महीने खुले रहते हैं। लेकिन सावन में भोले के दर्शनों का अपना अलग ही महत्व है।

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