जयपुर : बारावफात के मौके पर कानपुर के रावतपुर इलाके में मुस्लिम युवाओं की ओर से लगाए गए 'आई लव मोहम्मद' बैनर ने पूरे देश में विवाद खड़ा कर दिया। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस ने बैनर हटवाए और 9 लोगों को नामजद, 15 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार मामला सिर्फ बैनर का नहीं, बल्कि जुलूस के दौरान निर्धारित जगह से हटकर टेंट लगाने और दूसरे समुदाय के पोस्टर फाड़ने को लेकर था। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह सिर्फ पैगंबर मोहम्मद के प्रति सम्मान और प्यार जताने का तरीका था।
कानपुर में I love Mohammad से शुरू हुआ था विवाद (फोटो-ट्विटर)
इन शहरों में बढ़ा तनाव
इस विवाद ने लखनऊ, बरेली, नागपुर, काशीपुर और हैदराबाद समेत कई राज्यों में तनाव बढ़ा दिया। कई जगह जुलूस और प्रदर्शन हुए, कुछ जगह महिलाओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। प्रशासन ने कई लोगों को हिरासत में लिया और अतिक्रमण पर कार्रवाई की।
कानपुर से शुरू हुई विवादित घटना ने अब देश के कई हिस्सों में विवाद और तनाव को जन्म दिया है। शुरुआत में यह केवल सोशल मीडिया पर बहस के रूप में दिखी थी, लेकिन कुछ जगहों पर यह हिंसा में बदल गई। पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और नारेबाज़ी के कारण स्थानीय प्रशासन को बड़ी संख्या में पुलिस तैनात करनी पड़ी। बहुसंख्यक समाज के कुछ लोग इसे हिंदू धर्म के पक्ष में प्रतिक्रिया के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्या बोले जयपुर में मुस्लिम समुदाय के लोग
वहीं, जयपुर के मुसलमानों ने Times Now नवभारत से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि पैगंबर मोहम्मद उनके नबी हैं और उन्होंने हमेशा अमन, भाईचारा और एकता का संदेश दिया। उनका कहना है कि उनकी आस्था में कोई कमी नहीं है, लेकिन जो एफआईआर दर्ज हुई, वह सही नहीं थी।
जयपुर के मुस्लिम समुदाय ने जोर देकर कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और सेक्युलर देश है। यहां हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था मानने और उसे प्रकट करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पैगंबर मुहम्मद के नाम पर हिंसा, सिर तन से जुदा करने जैसे नारे लगाने का कोई समर्थन नहीं किया जा सकता।
साथ ही समुदाय ने नवरात्रि के समय पंडालों में हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की भी निंदा की। उनका कहना है कि पैगंबर मोहम्मद ने कभी किसी को तकलीफ नहीं दी, इसलिए उनके नबी का अपमान किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग नारेबाजी कर रहे हैं, वे वास्तव में दंगाई हैं और उनका मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
विवादों में सोशल मीडिया का बड़ा हाथ
समुदाय ने यह भी सुझाव दिया कि हिंदुओं के त्योहारों पर माहौल बिगाड़ने वाले लोग वास्तव में मुसलमान हैं या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। कभी-कभी बाहरी लोग या मजाक में ऐसे काम कर सकते हैं, इसलिए सही जांच और तथ्यपरक कार्रवाई जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादों में सोशल मीडिया का बड़ा हाथ होता है। छोटी-छोटी घटनाओं को भड़काकर दोनों समुदायों के बीच गलतफहमी और तनाव पैदा किया जा सकता है। ऐसे समय में सामूहिक संयम, प्रशासनिक सतर्कता और सही जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है।
जयपुर के मुस्लिम समुदाय ने जोर देकर कहा कि वे अपने धर्म का सम्मान करते हैं और दूसरों के त्योहारों, विश्वास और आस्था का भी सम्मान करेंगे। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसी घटनाओं में त्वरित और निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि किसी भी तरह के दंगे और सामाजिक तनाव को रोका जा सके।
