Kanpur: इंसानियत शर्मसार, भिखारी गैंग ने युवक के हाथ-पैर तोड़े, आंखें फोड़ी

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  • Updated Nov 4, 2022, 05:40 PM IST

Kanpur Human Trafficking Case: कानपुर दक्षिण से सनसनीखेज मामला सामने आया है। मछरिया में रहने वाले एक युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर उसे साथ ले जाकर हाथ-पैर तोड़कर आंखें फोड़कर भीख मंगवाने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर युवक को मेडिकल के लिए भेज दिया है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश में टीमों का गठन कर दिया है।

KEY HIGHLIGHTS
  • कानपुर में युवक के हाथ और पैर तोड़कर फोड़ दीं आंखें
  • युवक को यातनाएं देकर मंगवाई गई भीख, 70 हजार में बेचा
  • पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

Kanpur Human Trafficking Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के मछरिया के युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर एक जानकार अपने साथ ले गया। इसके बाद आरोपी ने उसे झकरकटी पुल के नीचे बंधक बनाकर यातनाएं दीं। यहां युवक के हाथ-पैर तोड़ दिए और आंखें फोड़ दीं। यातनाएं देने के बाद उससे भीख मंगवाई गई। रविवार को किदवई नगर चौराहे पर वह राहगीर को मदद मांगते हुए मिला। राहगीर की मदद से सुरेश मांझी (30) नौबस्ता स्थित अपने घर पहुंचा। गुरुवार को मामले में परिजनों से नौबस्ता थाने में तहरीर दी। इस दौरान परिजनों ने हंगामा भी किया। डीसीपी साउथ प्रमोद कुमार ने बताया कि मामले में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है।

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दिल्ली में राज नाम के शख्स को 70 हजार रुपये में बेचा

जानकारी के अनुसार मूलरूप से बिहार के सीवान जिले का रहने वाला रमेश मांझी (38) अपने छोटे भाई सुरेश (30) के साथ मछरिया के नाला रोड पर झुग्गियों में रहता है। भिखारी गैंग के चंगुल से छूटकर घर पहुंचे सुरेश ने बताया कि करीब छह महीने पहले मछरिया में रहने वाला विजय काम के बहाने अपने साथ ले गया था। आरोपी उसे सुनसान जगह ले गया और दोनों हाथ-पैर तोड़ दिए। आरोपी ने 12 दिनों तक अपने घर में कैद करके रखा। आरोपी ने दोनों आंखें केमिकल डालकर फोड़ दीं। इसके बाद आरोपी ने चापड़ से दांत तोड़ दिए। झकरकटी पुल के नीचे बस्ती में विजय ने उसे किसी औरत को सौंप दिया। यहां उसे जहरीले इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद विजय को राजधानी दिल्ली में राज नाम के शख्स को 70 हजार रुपये में बेच डाला। यहां उससे भीख मंगवाई गई। सुरेश ने बताया कि दिल्ली के नगोई में बंद कमरे में रखा जाता था। मेरे जैसे वहां बहुत लोग थे। रोजाना सड़क-चौराहों पर दिनभर भीख मांगते थे। शाम को एक साहब आता और पूरा पैसा ले जाता था। उसके बाद रात में उसी कमरे में बंद कर देते थे।

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