साइबर क्राइम के मामले देश में तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल से भी सामने आया। यहां एक व्यक्ति का डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपये की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। लेकिन ये टीम पुलिस ने नहीं बच पाई। साइबर क्राइम पुलिस और पश्चिम बंगाल सीआईडी ने संयुक्त अभियान चलाकर इस मामले से जुड़े 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया और कोर्ट के सामने पेश किया।
डिजिटल अरेस्ट केस में 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा (फोटो- पश्चिम बंगाल पुलिस)
कोर्ट ने सुनाई सजा
डिजिटल अरेस्ट के मामले में गिरफ्तार 9 आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया। कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों को दोषी करार करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कल्याणी उपजिला न्यायालय ने इनके लिए उम्रकैद की सजा का ऐलान किया है। देश के इतिहास में यह पहला मामला है, जिसमें साइबर अपराधियों को इतनी कठोर सजा सुनायी गयी है।
क्या है पूरा माजरा
जानकारी के अनुसार, पुलिस को एक सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक से लगभग एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुआ है। साइबर अपराधियों ने डर दिखाकर किस्तों में उससे करोड़ों रुपये की ठगी की वारदात को अंजाम दिया।
जांच के दौरान कल्याणी साइबर क्राइम शाखा की टीम ने छह नवंबर को इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया। यह अपराधी राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात के निवासी हैं। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। इनके पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, पैन कार्ड और कई दस्तावेज बरामद हुए थे और इन आरोपियों ने देश के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की थी।
कंबोडिया में है गिरोह का मुखिया
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि यह ठगी करके प्राप्त किया गया पैसा विदेश भेजा गया था। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि इस गिरोह का मुखिया कंबोडिया में है। सारी जानकारी हासिल करने के बाद, पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ 2,000 पन्नों की chargesheet फाइल की। इसके बाद अदालत में सुनवाई चलने के बाद गुरुवार को सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया गया और शुक्रवार को सभी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी।
