Kal Ka Mausam: उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक मानसून दिखाएगा दम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; तेज हवाएं भी बढ़ाएंगी मुश्किलें

Kal Ka Mausam 27 July 2026, कल का मौसम कैसा रहेगा: देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है। मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

Kal Ka Mausam 27 July 2026: देशभर में मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई हिस्सों के लिए बारिश, तेज हवाओं और कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। बात अगर वेदर सिस्टम की करें तो मानसूनी ट्रफ फिलहाल सक्रिय है और निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर बनी हुई है। वहीं, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब मजबूत होकर अवदाब (डिप्रेशन) में बदल गया है।

Kal Ka Mausam

कल का मौसम कैसा रहेगा?

रविवार, 26 जुलाई 2026 को सुबह 8:30 बजे यह प्रणाली 20.6° उत्तरी अक्षांश और 88.4° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित थी। यह सागर द्वीप, दीघा, चांदबली और बालासोर से समुद्री क्षेत्र में स्थित है तथा इसके अगले 24 घंटों में और अधिक मजबूत होकर गहरे अवदाब (डीप डिप्रेशन) में परिवर्तित होने की संभावना है। इसके 27 जुलाई की पूर्वाह्न या दोपहर के आसपास पारादीप और सागर द्वीप के बीच उत्तर ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल तट को पार करने का अनुमान है। दूसरी ओर, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम राजस्थान और आसपास के इलाकों में सक्रिय है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य भारत के ऊपर लगभग 23° उत्तरी अक्षांश के आसपास निचले और मध्य क्षोभमंडलीय स्तरों में पूर्व-पश्चिम दिशा में एक सक्रिय शियर जोन बना हुआ है। इसके अलावा, एक पश्चिमी विक्षोभ मध्य और ऊपरी क्षोभमंडलीय स्तरों में 62° पूर्वी देशांतर के आसपास, 30° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में सक्रिय है। वहीं, निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में असम के मध्य भागों पर भी एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है, जिससे पूर्वोत्तर भारत में वर्षा गतिविधियों को और बल मिलने की संभावना है।

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