Jammu Kashmir हमेशा से ही बहुत संवेदनशील राज्य रहा है। राज्य में पाकिस्तान की तरफ से तो आतंकवादियों की घुसपैठ की खबरें अक्सर ही आती रहती हैं। यहां पर रोहिंग्या (Rohingya) और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या भी चिंताजनक है। राज्य में जनसांख्यिकी बदलावों की जांच की गई है।
जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या की संख्या चिंताजनक (AI Image)
जनसांख्यिकी बदलाव से जुड़े मामलों की जांच कर रही नावलेकर समिति के सामने राज्य सरकार ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी से जुड़े आंकड़े पेश किए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में कुल 7656 रोहिंग्या और 504 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई है।
ये आंकड़े चौकाने वाले हैं
आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू संभाग के 10 जिलों में 6737 रोहिंग्या और 46 बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं। वहीं कश्मीर संभाग के 10 जिलों में 919 रोहिंग्या और 458 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई है। यह जानकारी समिति को 10 अगस्त को जम्मू दौरे के दौरान दी गई।
इन जिलों में है रोहिंग्या की मौजूदगी
जम्मू संभाग में रोहिंग्याओं की मौजूदगी डोडा, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, पुंछ, राजोरी, रियासी, सांबा, उधमपुर और रामबन जिलों में बताई गई है। जबकि कश्मीर संभाग में श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, बारामुला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा में उनकी पहचान हुई है।
LOC के पास रोहिंग्या की मौजूदगी चिंताजनक
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो सालों में रोहिंग्या बस्तियों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान बॉर्डर और LoC के नजदीक उनकी मौजूदगी को सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय माना जा रहा है। जम्मू में रोहिंग्याओं से जुड़े 101 मामले दर्ज होने की जानकारी भी समिति के सामने रखी गई। इनमें 179 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं। कश्मीर घाटी में 16 मामले दर्ज हैं, जिनमें 41 महिलाएं और चार पुरुष बताए गए हैं।
संगठित अपराध में शामिल रोहिंग्या
सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ रोहिंग्या लोगों के संगठित अपराध, नशा तस्करी और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका भी जताई है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में रोहिंग्या महिलाओं को जम्मू से कश्मीर लाकर स्थानीय पुरुषों से शादी कराने की जानकारी भी सामने आई है। जांच के दौरान कुछ महिलाओं के यौन शोषण का शिकार होने के मामलों का भी पता चला है।
समिति को एक साल के अंदर रिपोर्ट सौंपनी है
पाकिस्तान सीमा के नजदीक उनकी मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां निगरानी बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। केंद्र सरकार ने 26 मई को नावलेकर समिति का गठन किया था। समिति को जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ और उससे जुड़े जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर उससे निपटने के उपाय सुझाने हैं। समिति को एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है।
