NEET UG Result 2025 : नीट यूजी 2025 के परिणामों के बीच मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के राजपुर खेड़ा गांव के रामबाबू डांगी ने एक अनूठी सफलता हासिल की है। कभी अपने पिता के साथ खेतों में काम करने वाले इस युवा ने नीट यूजी 2025 की परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में क्लियर किया है। 26 फरवरी 2007 को जन्मे रामबाबू ने 720 में से शानदार 530 अंक प्राप्त किए और ओबीसी-एनसीएल (केंद्रीय सूची) श्रेणी में 10,816वीं रैंक हासिल की।
रामबाबू डांगी
इस शानदार प्रदर्शन से छात्र रामबाबू सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिलना लगभग तय है। रामबाबू कोटा में नीट यूजी की तैयारी के लिए आए थे और उन्होंने मोशन एजुकेशन कोचिंग के ध्रुव रेजिडेंशियल प्रोग्राम में प्रवेश लिया। उन्होंने जमकर मेहनत की और 12वीं कक्षा के साथ ही पहले प्रयास में नीट यूजी में रैंक हासिल की, जिससे उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने की संभावना मजबूत हो गई है।
गांव में खुशी की लहर दौड़ गई जब रामबाबू ने NEET में सफलता की खबर दी। उनके पिता रतनलाल किसान हैं और मां भगवती बाई गृहणी होने के साथ खेतों में भी सहयोग करती हैं। महज दस बीघा जमीन के सहारे माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
कैसा रहा नीट तक सफर
छात्र रामबाबू का कहना है कि दसवीं में उन्हें 86 फीसदी अंक मिलने के बाद मैंने ठाना था कि मुझे मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाना है। मैं प्रतिदिन 25 किलोमीटर बस से स्कूल जाता था। मैंने 11वीं के साथ ही कोटा में मोशन एजुकेशन के ध्रुव रेजिडेंशियल प्रोग्राम से NEET UG की तैयारी शुरू की थी। मेरा लक्ष्य 650 अंक था, क्योंकि इसी रैंक पर सरकारी मेडिकल सीट मिलती है। इस बार पेपर काफी कठिन था, लेकिन मैंने पूरी मेहनत और फैकल्टी के गाइडेंस के साथ परीक्षा दी। 12वीं में मैंने 92% अंक हासिल किए और अब मैं अपने गांव का पहला MBBS डॉक्टर बनने जा रहा हूं।
मोशन एजुकेशन के संस्थापक एवं सीईओ नितिन विजय ने छात्रों की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि यह हमारे लिए केवल एक रिजल्ट नहीं, बल्कि एक संस्थान की सोच, संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी है। समर्पण, संघर्ष और सच्चे मार्गदर्शन के संगम से कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। रामबाबू डांगी और उनके परिवार को हमारी ओर से हार्दिक बधाई। नीट परिणाम 2025 में कुल 12,36,531 छात्र सफल हुए हैं, जिसमें 5,64,611 ओबीसी, 1,68,873 एससी, 67,234 एसटी, 3,38,728 सामान्य (सामान्य) और 97,085 ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थी शामिल हैं।
क्या कहते हैं पिता?
पिता रतनलाल कहते हैं कि जब बेटे ने रिज़ल्ट बताया, तो हम खुशी से झूम उठे। पूरे गांव में मिठाई बांटी गई। रामबाबू की सफलता यह साबित करती है कि जुनून और मेहनत के आगे भौगोलिक सीमाएं कभी बाधा नहीं बनतीं। उसका सफर गांव के हर बच्चे को नई उम्मीद देगा।”
