Anurag Maloo: किशनगढ़ निवासी पर्वतारोही अनुराग मालू रेस्क्यू ऑपरेशन में सुरक्षित मिल गए हैं और उसका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत गंभीर है। सेवन समिट ट्रैक्स के मिंगमा शेरपा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अनुराग का मणिपाल अस्पताल में इलाज चल रहा है।
अनुराग मालू रेस्क्यू ऑपरेशन में मिले सुरक्षित
पर्वतारोही अनुराग मालू की नेपाल में माउंट अन्नपूर्णा से लापता होने की सूचना मिली थी। मालू नेपाल में माउंट अन्नपूर्णा की चढ़ाई करने के लिए पहुंचे हुए थे। सोमवार को जानकारी आई थी कि वह एक दरार के अंदर गिर गए हैं। तभी से उन्हें ढूंढ़ने की कोशिशें लगातार जारी थी।
मिली जानकारी के अनुसार रेस्क्यू के बाद अनुराग को काठमांडू स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अनुराग नेपाल के अन्नपूर्णा हिल्स से छह हजार फीट नीचे गिरे थे। तीन दिन से पूरे परिवारजन और शहरवासी भगवान से अनुराग के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे थे। अनुराग की सकुशलता के लिए घर की महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ लगातार कर रही थीं। इस खबर के बाद विधायक सुरेश टाक, सभापति दिनेश सिंह राठौड़, भाजपा नेता शशिकांत पाटोदिया अनुराग मालू के घर पहुंचे।
अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिख लापता युवक की तलाश में तेजी लाने व नेपाल स्थित दूतावास को मदद देने लिए निवेदन किया था। अनुराग के के लापता होने की सूचना के बाद से परिजन बेहद परेशान थे। सांसद भागीरथ चौधरी भी लगातार विदेश मंत्रालय से संपर्क में थे।
कैंप लौटते समय दरार में गिर गए थे
पेशे से उद्यमी अनुराग मालू कैंप IV से लौटते समय कैंप III के नीचे एक दरार में गिर गए थे। पर्वतारोही के अभियान आयोजक के एक अधिकारी ने मीडिया से इसकी पुष्टि की थी। 34 साल के अनुराग मालू राजस्थान के किशनगढ़ के रहने वाले हैं।
अन्नपूर्णा दुनिया का दसवां सबसे ऊंचा पर्वत है और पर्वतारोहियों के लिए सबसे खतरनाक पर्वतों में से एक है। अनुराग इसी की चढ़ाई करने गए थे। अनुराग एक बेहतरीन पर्वतारोही हैं। इससे पहले उन्होंने कई पर्वतों की चढ़ाई की है।
अनुराग मालू ने पिछले साल ही माउंट अमा डबलाम पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी और माउंट एवरेस्ट, अन्नपूर्णा और ल्होत्से पर चढ़ने की योजना बना रहे थे। मालू को पहले REX कर्मवीर चक्र से सम्मानित किया गया था और वह भारत से 2041 अंटार्कटिक यूथ एंबेसडर बने थे। उन्होंने पहाड़ों पर चढ़ने के लिए प्रसिद्ध पर्वतारोही बछेंद्री पाल से मार्गदर्शन लिया था।
