नई दिल्ली: राजस्थान के सीकर जिले के रेवासा धाम में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संत-महात्माओं और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो विश्व का कल्याण करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा, धर्म के पालन और संतों की परंपरा, हमारी राष्ट्रीय शक्ति और ओज का आधार है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत (PHOTO-ANI)
भागवत ने कहा कि जीवन में क्या मिलता है और क्या नहीं, इससे संतों और स्वयंसेवकों को कोई मतलब नहीं होता। उनका लक्ष्य केवल राष्ट्र और धर्म की सेवा है। संघ एक जीवन शैली का नाम है, जो तन-मन-धन से निस्वार्थ भाव से हिंदू धर्म और राष्ट्र की उन्नति के लिए कार्य करता है।
भारत ने हमेशा दुनिया का मार्गदर्शन किया है
उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब दुनिया को दिशा देने की आवश्यकता हुई, तब-तब भारत ने अपने संतों और ऋषियों के ज्ञान से विश्व को मार्गदर्शन दिया। वेद और शास्त्रों में संपूर्ण जीवन का ज्ञान निहित है, और यही भारत की सबसे बड़ी धरोहर है।
दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों के मामले में सबसे आगे है भारत
आजादी के बाद के इतिहास का ज़िक्र करते हुए भागवत बोले कि कई लोगों ने कहा था कि भारत में लोकतंत्र चल नहीं पाएगा, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि भारत न केवल लोकतंत्र में सफल है, बल्कि पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों के मामले में सबसे आगे है। यह हमारी संस्कृति और संतों के जीवन आदर्श की देन है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध पूजा-पद्धतियां हैं, लेकिन उनका सार एक ही है-मानवता का कल्याण। संतों का रूप भले ही अलग-अलग हो, लेकिन उनका संदेश और लक्ष्य समान है।
कार्यक्रम में अनेक संत-महात्माओं का आगमन हुआ और यह विश्वास जताया गया कि रेवासा धाम की यह परंपरा भविष्य में भी इसी प्रकार आगे बढ़ती रहेगी। यह दौरान भागवत ने कहा कि मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरा स्नेह से अपने स्वागत किया जो सद्भावना अच्छे शब्दों में प्रकट की है।
