Heat Score: दक्षिण के प्रायद्वीपीय हिस्से को छोड़क देश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों प्रचंड गर्मी पड़ रही है। कल यानी सोमवार 25 मई से शुरू हुए नौतपा में इसके और भी बढ़ने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा टेम्प्रेचर मैप के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिमी भारत के बड़े हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। सोमवार को राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड हुआ।
देश का हीट मैप दिखा रहा लू की डरावनी तस्वीर
सोमवार को बांदा सबसे गर्म रहा
टेम्प्रेचर मैप में राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों को सबसे ज्यादा गर्म श्रेणी में दिखाया गया है, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। यहां प्रचंड Heatwave का असर दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के बांदा में सोमवार 25 मई को पारा 47.6 डिग्री तक पहुंच गया। इसके अलावा मध्य भारत के कई हिस्सों में भी तापमान सामान्य से अधिक ही रिकॉर्ड हुआ। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि साफ आसमान और शुष्क हवाओं के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
वॉर्म नाइट के चलते नींद भी उड़ रही
न्यूनतम तापमान के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों को रात के समय भी राहत नहीं मिल रही। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 'वॉर्म नाइट' के हालात बने हुए हैं। इससे गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर
औसत तापमान भी सामान्य से ज्यादा
IMD के तापमान विसंगति (Temperature Anomaly) मैप से पता चलता है कि देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और औसत तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया है। विशेष रूप से उत्तर और मध्य भारत में तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बना हुआ है।
ये सावधानियां बरतें आप
लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और हीटवेव से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में गर्मी का असर जारी रह सकता है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से हल्की राहत मिलने की भी संभावना है।
