Homebuyers News: फ्लैट खरीदारों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अपने एक अहम फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि फ्लैट मिलने में हुई देरी पर ब्याज पाने का कानूनी अधिकार केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जाता कि खरीदार को फ्लैट का पजेशन मिल गया है। न्यायाधीश जगमोहन बंसल ने अपने आदेश में कहा कि सेक्शन 18 (1) के तहत प्रोमोटर की जवाबदेही बनती है और इस जवाबदेही को कॉन्ट्रैक्चुअल टर्म अथवा बॉयर ने फ्लैट का पजेशन स्वीकार कर लिया है, इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का अहम फैसला।
अदालत ने एक सीमा का सिद्धांत तय किया
हालांकि अदालत ने एक सीमा का सिद्धांत तय किया है। अदालत ने कहा कि RERA में ऐसी शिकायतें दाखिल करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन खरीदार अनिश्चितकाल तक प्राधिकरण के पास शिकायत लेकर नहीं जा सकते। गुड़गांव ग्रीन्स, सेक्टर-102 के होमबायर्स से जुड़े मामलों में Emaar India की ओर से दायर 47 अपीलों पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि जहां घर का कब्जा और कन्वेयंस डीड दोनों हो चुके हैं, वहां कब्जा मिलने की तारीख से तीन साल शिकायत दाखिल करने के लिए सामान्यतः उचित अवधि मानी जाएगी। हालांकि, 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 तक की कोविड अवधि को इस गणना से बाहर रखा जाएगा।
Emaar की दलील खारिज
अदालत ने Emaar की उस दलील को खारिज कर दिया कि कन्वेयंस डीड के निष्पादन के साथ ही अनुबंध संबंध समाप्त हो गया और इसके बाद खरीदार देरी से कब्जा मिलने पर ब्याज की मांग को लेकर हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) का रुख नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने कहा कि RERA की धारा 19(8) के विपरीत, जिसमें आपसी सहमति से आवंटी की ब्याज देनदारी कम करने की स्पष्ट अनुमति है, धारा 18(1) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी समझौते के जरिए बिल्डर की देनदारी को माफ या कम करने की अनुमति देता हो।
आवंटी को प्राधिकरण के समक्ष शिकायत करने का अधिकार
अदालत ने कहा कि घर का कब्जा स्वीकार करना और कन्वेयंस डीड पर हस्ताक्षर करना, अपने आप में देरी के लिए ब्याज मांगने के अधिकार को छोड़ना नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, बिल्डर की ब्याज संबंधी देनदारी उस समय तय हो जाती है जब घर का कब्जा सौंप दिया जाता है। यदि प्रमोटर ने अपनी देनदारी पूरी नहीं की है, तो आवंटी को प्राधिकरण के समक्ष शिकायत करने का अधिकार है।
