Greater Noida West: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग लंबे समय से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां आए दिन सोसायटी के लोग पानी की समस्या को लेकर प्रदर्शन करते रहते हैं। उनकी ये समस्या जल्द ही दूर होने वाली है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के घरों तक गंगाजल पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो गया है। वहीं अंडरग्राउंड वाटर रिजर्व का निर्माण अंतिम चरण में है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गंगाजल आपूर्ति करने की योजना पर कार्य तेजी से करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों को मिलेगा गंगा जल
वर्ष 2023 में पहुंचना था गंगाजल
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए गंगाजल पहुंचना पहली प्राथमिकता बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गंगाजल ग्रेटर नोएडा वेस्ट के इलाकों में मार्च 2023 तक पहुंचना था। लेकिन किसी कारण वर्ष ऐसा हो न सका। उसके बाद आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगाजल आपूर्ति का कार्य पूरा करने का काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, आने वाले महीने में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के घरों में 50 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पानी की किल्लत
पिछले कुछ माह से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। यहां पानी का संकट लगातार बना हुआ है। कुछ इलाकों में तो पानी के टैंकरों के सहारे आवश्यकता पूरी की जा रही है। लोगों को पानी के लिए परेशान होते देख ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यहां गंगाजल पहुंचाने की योजना बनाई और इस काम को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
चार माह में होगी गंगाजल की आपूर्ति
प्राधिकरण द्वारा दी जानकारी के अनुसार, आने वाले चार महिने में यूजीआर का कार्य पूरा करके ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गंगाजल पहुंचाया जाएगा। फिलहाल गंगाजल की मात्रा 50 एमएलडी होगी। लेकिन भविष्य में आवश्यकता के अनुसार, इसकी मात्रा भी बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही प्राधिकरण ने संबंधित विभाग को पंप सेट की जांच करने और यदि उनमें किसी प्रकार की दिक्कत मिलती है तो उसे तत्काल प्रभाव से सही करने के लिए कहा है। जानकारी के लिए बता दें कि पानी की समस्या को खत्म करने के लिए प्राधिकरण ने 85 क्यूसेक क्षमता की गंगाजल परियोजना तैयार की है। इसमें 25 यूजीआर बनाए गए हैं। उन्हें सुरक्षित करने के लिए चारदीवारी बनाने का काम भी किया गया है।
