'पास में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने' ये कहावत तो आपने सुनी होगी। लेकिन यह उस स्थिति में सार्थक होती है, जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक कुछ करने की कोशिश करता है। गाजियाबाद के पास मोदीनगर के एक शख्स के सिर पर उस समय वज्रघात हुआ, जब उसे 7.92 करोड़ का इनकम टेक्स नोटिस मिला।
आयकर नोटिस
खाते में सिर्फ 30 रुपये
आश्चर्यजनक बात तो ये है कि जिस व्यक्ति को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इतना बड़ा नोटिस भेजा है, उसके खाते में महज 30 रुपये हैं। हरीश कुमार नाम के इस शख्स की मासिक आमदनी भी सिर्फ 8 हजार रुपये है। ऐसे में निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि इनकम टैक्स विभाग से कोई गलती हुई है।ये है ट्विस्ट
भले ही पहली नजर में यह इनकम टैक्स विभाग की गलती लगती हो, लेकिन विभाग ने इस कामगार के नाम से संचालित फर्म में बड़ा लेन-देन दिर्शाया है। फर्म में बड़े लेन-देन की वजह से इस शख्स की आय ज्यादा होने पर विभाग ने उसे नोटिस भेजा है। हालांकि, उसे इस फर्म के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इससे स्पष्ट है कि फर्म में उसके डॉक्यूमेंट्स का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। कामगार ने इस संबंध में थाने में शिकायत दर्ज करवाकर कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अभी कार्रवाई नहीं हुई है।हरीश कुमार, मोदी नगर में रहते हैं और यहां एक फैक्ट्री में काम करते हैं। उनके पिता पावरलूम फैक्ट्री में और मां एक ढाबे में काम करती हैं। हरीश को होली से पहले यह नोटिस मिला था। नोटिस अंग्रेजी में होने की वजह से उन्हें कुछ समझ नहीं आया। बाद में जब उन्होंने पड़ोसी को दिखाया तो उन्होंने बताया कि यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस है।
हरीश के खाते में सिर्फ 30 रुपये हैं। आयकर विभाग ने उन्हें दो नोटिस भेजे, जिसके बाद वह आयकर दफ्तर पहुंचे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां उन्हें आयकर अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि यह नोटिस सिस्टम जेनरेटेड होते हैं और ट्रांजेक्शन के आधार पर ही नोटिस दिया है।
