Sachin Pilot: राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पुरानी राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सतह पर आती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया "भूल जाओ और माफ कर दो" वाले बयान के बाद सचिन पायलट ने भी बिना नाम लिए जवाब दिया है, जिससे साफ है कि प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से दोनों खेमों में फिर टकराव शुरू हो गया है। लेकिन अब यह टकराव केवल प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहेगी। बल्कि इसके साइड इफेक्ट पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर दिख सकती है और इसका खामियाजा पार्टी को निश्चित रूप से भुगतना हो सकता है।
सचिन पायलट (फाइल फोटो)
भविष्यवाणियां करने लग जाएंगे, तो जनता को कौन पूछेगा?
करौली में आयोजित किसान सम्मेलन में सचिन पायलट ने कहा कि वे 25 साल से राजनीति में हैं और बहुत चालें देख चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका किसी से कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है, लेकिन सच्चाई के साथ खड़ा होना जरूरी है। पायलट ने कहा कि संघर्ष जरूरी है, संयम जरूरी है, संतोष जरूरी है और सम्मान देना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के लोग क्या व्यवहार करेंगे, यह उनके हाथ में नहीं है। पायलट ने कहा हम सब यदि भविष्यवाणियां करने लग जाएंगे, तो जनता को कौन पूछेगा? ये जो 'एडवांस बुकिंग' वाला मामला है, इसका कोई सर-पैर नहीं है। संगठन की नजर में जब जो उपयुक्त होगा, उसे वो जिम्मेदारी मिलेगी...और न भी मिले। सिर्फ फल प्राप्ति की अगर कोई राजनीति कर रहा है, तो वो ज्यादातर समय नाखुश ही रहेगा। पायलट ने ये भी कहा कि मैं उस समय कॉलेज में पढ़ता था, तो एक बहुत प्रसिद्ध तांत्रिक हुआ करता था। और उसने बहुत सारे प्रभावशाली लोगों को अपने कब्जे में कर रखा था। लेकिन उसकी गतिविधियां जो थीं, वो राष्ट्र के हित में नहीं थीं। उस व्यक्ति पर हाथ डालने में बहुत लोग कतराते थे।
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों पर पड़ सकता है असर
पायलट के आज के इस बयान से पहले अशोक गहलोत ने एक बार फिर 2020 के मानेसर प्रकरण का जिक्र करते हुए पायलट पर निशाना साधा था। गहलोत ने कहा था कि उस समय जो हुआ वह सरकार को अस्थिर करने की कोशिश थी और उस घटनाक्रम को गलती मानना चाहिए। गहलोत के बयान के बाद पायलट की प्रतिक्रिया को राजनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में राहुल गांधी के पुष्कर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के कामकाज की खुलकर सराहना की थी। उन्होंने दोनों नेताओं की कार्यशैली को संगठन के लिए सकारात्मक बताया था। गहलोत और पायलट के बीच बयानबाजी का असर आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों पर पड़ सकता है। प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में यदि दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती है तो इसका असर संगठनात्मक एकजुटता पर दिखाई दे सकता है।
रमेश मीणा ने साधा अशोक गहलोत पर निशाना
वहीं कांग्रेस के पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने अशोक गहलोत पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "जब-जब कांग्रेस आगे बढ़ी है, तब-तब इस व्यक्ति ने उसे पीछे धकेलने का काम किया है। तीन बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद इन्होंने सरकार और संगठन, दोनों को नुकसान पहुंचाया है। मैं राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि आप आम आदमी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, सड़कों पर लड़ रहे हैं, गरीबों से मिल रहे हैं और उनकी आवाज उठा रहे हैं। आप सड़क से लेकर सदन तक किसानों और आमजन की समस्याओं को मजबूती से रख रहे हैं।
लेकिन यदि ऐसे लोगों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। आप राजस्थान आते हैं, कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि कुछ लोगों ने पहले भी कांग्रेस को कमजोर करने का काम किया है। सत्ता मिलने के बाद भी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। हम आपसे यही कहना चाहते हैं कि सही आकलन कीजिए, सही लोगों को जिम्मेदारी दीजिए, ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं पर विश्वास कीजिए तथा उनका सम्मान कीजिए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोहराते है कि मानेसर जो विधायक गए थे उनको 10-10 करोड़ रुपये दिए गए थे। मैं उनको चैलेंज करता हूं कि रमेश मीणा ने 10 करोड़ रुपये लिए है तो मेरा नार्को टेस्ट करा दे और आपका भी नार्को टेस्ट करवा ले कि आपने निर्दलीय BTP के विधायकों को कितने रुपये दिए वो कागज हमारे पास भी है।
