रामगढ़ नाम सुनते ही आपको याद आती होगी फिल्म शोले... साथ ही याद आते होंगे जय-वीरू और गब्बर सिंह। जी हां 1975 में आई रमेश सिप्पी की फिल्म शोले ने रामगढ़ की कुछ ऐसी ही तस्वीर हमारी पीढ़ियों के दिमाग में खींच दी है। लेकिन हम आपको आज एक ऐसे रामगढ़ के बारे में बता रहे हैं, जिसे हिडेन ज्वेल कहा जाता है। इस रामगढ़ को फलों का टोकरा भी कहा जाता है। देखने में इतना खूबसूरत की शरीर भले कहीं भी चला जाए, मन रामगढ़ में ही अटका रह जाता है। तो फिर देर किस बात की चलतें हैं रामगढ़ की सैर पर।
रामगढ़ की खूबसूरती मन मोह लेगी
कहां है रामगढ़
रामगढ़ उत्तराखंड के नैनीताल जिले में है। यह खूबसूरत पहाड़ी कस्बा काठगोदाम रेलवे स्टेशन से सिर्फ 45 किमी की दूरी पर है। अगर आप हवाई जहाज से आना चाहते हैं तो पंतनगर एयरपोर्ट यहां से 76 किमी दूर है, जहां से गाड़ियां और टैक्सी आपको आसानी से मिल जाएंगी। बता दें कि एक समय रामगढ़ अंग्रेज आर्मी की कैंट एरिया था।क्यों मशहूर है और कब जाएं रामगढ़
रामगढ़ को हिडन ज्वेल कहा जाता है। इसे फलों का टोकरा या फ्रूट बेल्ट ऑफ कुमाऊं भी कहते हैं। यहां पर सेब, आडू, नाशपाती, कीवी, अखरोट, माल्टा, प्लम जैसे कई फल प्रचुर मात्रा में होते हैं। रामगढ़ जाने के लिए कोई खास मौसम नहीं है, आप हर मौसम में यहां जा सकते हैं और हर मौसम में यह आपको पहले से ज्यादा खूबसूरत नजर आएगा। सर्दियों में यहां 3 फीट तक बर्फ गिरती है, जबकि गर्मियों में यहां का ठंडा मौसम आपको शहरों की चिलचिलाती गर्मी से राहत देता है। इसके अलावा मानसून के मौसम में यहां की हरियाली आपका दिल हर लेगी।माल्टा का पेड़
यहां के नजारे दिल लूट लेंगे
रामगढ़ के बारे में बता दें कि यह दो हिस्सों में बंटा है। मल्ला यानी ऊपरी रामगढ़ और तल्ला यानी निचला रामगढ़। रामगढ़ समुद्रतल से 1729 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। शहरों की भीड़भाड़ और शोर शराबे से दूर यह कस्बा बहुत ही सुकून देता है। यहां से हिमालय का बहुत ही खूबसूरत नजारा दिखता है, जिसे आप कभी भी अपने दिल से निकाल ही नहीं पाएंगे।चलिए अब घूमने हैं रामगढ़ के गली कूचे
रामगढ़ घूमने निकले हैं तो सबसे पहले आपको श्री ऑरोबिंदो के बसाए आश्रम में जरूर जाना चाहिए। यहां उनका बसाया मधुबन आश्रम है, जहां पर स्थानीय लोगों को कई तरह की आजीविका ट्रेनिंग भी दी जाती है। यह जगह मशहूर कवयित्री महादेवी वर्मा की सृजनपीठ भी है। रामगढ़ आएं तो यहां पर महादेवी वर्मा के नाम से बनी लाइब्रेरी में जरूर जाएं... यहां पर उनका साहित्य तो है ही। महादेवी वर्मा से जुड़ी कई चीजें भी देख सकते हैं। यहां उनके बर्तन आदि भी देख सकते हैं, कुल मिलाकर यह एक झरोखा है, जिससे आप इतिहास में झांक सकते हैं। यहां पर कुमाऊं यूनिवर्सिटी का एक कॉलेज भी है, जिसका नामकरण महादेवी वर्मा के नाम महादेवी वर्मा सृजन पीठ रखा गया है।टैगोर टॉप
गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की रचनाएं आप पसंद करते हैं तो आपको उनकी पसंद भी पसंद आएगी। उस दौर में जब रामगढ़ में आने-जाने की बहुत सुविधाएं नहीं थीं, तब गुरुदेव मल्ला रामगढ़ आए थे। यहां मल्ला रामगढ़ के ऊपर जंगल में उनका घर है। वह जहां रहे थे, उस जगह को आज टैगोर टॉप के नाम से जाना जाता है। यहीं पर अब विश्व भारती सेंट्रल यूनिवर्सिटी बन रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साल 2022 में इस विश्वविद्यालय की नींव रखी थी। यहां के कैंपस का नाम गीतांजली कैंपस रखा गया है।रामगढ़ के खूबसूरत नजारे
