मुगल सल्तनत की शान से विश्व धरोहर स्थल के खिताब तक, जानें आगरा फोर्ट के लाल पत्थरों में बसती है किस इतिहास की अनोखी दास्तान

आगरा किला सिर्फ एक मजबूत किला नहीं, बल्कि मुगल साम्राज्य की स्थापत्य कला और राजनीतिक शक्ति का प्रतीक है। यमुना नदी के किनारे स्थित इस किले ने कई शासकों के शासन और ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह बनकर अपनी महत्ता स्थापित की। इसके विशाल महल, दीवारें और भव्य संरचनाएं मुगल वास्तुकला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। ताजमहल के निकट होने के कारण, यह किला आज इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए दिलचस्प बन गया है। ऐसे में आइए जानते हैं इस किले का रोचक इतिहास।

Agra Fort History: आगरा उत्तर प्रदेश समेत भारत का जाना माना शहर है। जहां आगरा किला है। यह सिर्फ एक मजबूत किला नहीं है, बल्कि यह मुगल साम्राज्य की रणनीतिक सोच और स्थापत्य कौशल का बेहतरीन उदाहरण भी है। इसकी लाल बलुआ पत्थर की भव्य दीवारें और विशाल गेट इस बात का प्रमाण हैं कि इसे सिर्फ रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि साम्राज्य की शक्ति और वैभव को प्रदर्शित करने के लिए भी बनाया गया था। किले के भीतर कई महल हैं। इसके अलावा, किले में मस्जिदें और छोटी-छोटी झीलें भी हैं, जो इस ऐतिहासिक इमारत की शाही जीवनशैली की झलक दिखाती हैं। यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण यह किला न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह शहर की सुंदरता में भी चार चांद लगाता है। समय के साथ-साथ आगरा किले ने कई ऐतिहासिक घटनाओं और मुगल सम्राटों के शासनकाल का गवाह बनकर अपनी प्रतिष्ठा बनाई। आज यह किला इतिहास प्रेमियों के लिए एक आकर्षक स्थल है, जहां आप न केवल मुगलों की स्थापत्य कला का आनंद ले सकते हैं, बल्कि उस समय की जीवनशैली और राजनीतिक इतिहास की भी झलक पा सकते हैं। इस प्रकार, आगरा किला ताजमहल के अलावा शहर का एक और गौरव है, जो आगरा की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संजोए हुए है और हर आगरा यात्रा का अनिवार्य आकर्षण बन चुका है। ऐसे में आइए जानते हैं इसका इतिहास।

History of Agra Fort

आगरा किले का इतिहास

आगरा का किला किसने बनवाया था? (फोटो: Canva)

किसने बनवाया था आगरा का किला?

इतिहासकारों के मुताबिक, आगरा के किले का निर्माण सबसे पहले सिकंदर लोदी ने 1504 में शुरू किया था। Agra.nic.in पर दी गई जानकारी के मुताबिक, 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में विजयी होने के बाद, बाबर आगरा किले में इब्राहिम लोदी के महल में ठहरा। इस दौरान उसने किले में एक बावली (कुआं) भी बनवाई। उसके उत्तराधिकारी हुमायूं ने 1530 में इसी किले में राज्याभिषेक किया। 1540 में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को बिलग्राम में हराकर आगरा पर कब्जा कर लिया। सूरियों के अधीन यह किला 1555 तक रहा, जब हुमायूं ने इसे फिर से हासिल किया। 1556 में आदिल शाह सूरी के सेनापति हेमू ने आगरा पर पुनः अधिकार किया और भागते हुए शासक का दिल्ली तक पीछा किया, जहां तुगलकाबाद के युद्ध में उसे मुगलों से सामना करना पड़ा। आगरा किले का शीश महल उस समय मोमबत्तियों की रोशनी में अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध था। इस किले की केंद्रीय स्थिति और महत्व को देखते हुए, अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया और 1558 में आगरा पहुंचे। उनके इतिहासकार अबुल फजल के अनुसार, उस समय यह किला ईंटों से बना था और ‘बादलगढ़’ के नाम से जाना जाता था। यह खंडहरों की स्थिति में था, जिसे अकबर ने राजस्थान के धौलपुर जिले के बरौली क्षेत्र से लाल बलुआ पत्थर मंगवाकर पुनर्निर्मित करवाया। वास्तुकारों ने किले की नींव तैयार की और आंतरिक हिस्से को ईंटों, जबकि बाहरी हिस्से को बलुआ पत्थर से सजाया। इस परियोजना में लगभग 4,000 कारीगरों ने आठ वर्षों तक प्रतिदिन मेहनत की और 1573 में किले का निर्माण पूर्ण हुआ।

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