Greater Noida Child Drowning Case: ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है। जानकारी के मुताबिक, बिसरख थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चिपयाना गांव से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां तालाब में डूबने से पांच वर्षीय मासूम की मौत हो गई। मृतक बच्चे की पहचान ईशु के रूप में हुई है, जो 18 फरवरी से लापता था। परिजनों के अनुसार, ईशु 18 फरवरी को घर के बाहर खेल रहा था, तभी अचानक गायब हो गया। परिवार के सदस्यों और गांव वालों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। बाद में परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस भी बच्चे की खोजबीन में जुट गई। सोमवार को जब गांव के तालाब में एक बच्चे का शव मिला, तो इलाके में सनसनी फैल गई। बाद में शव की पहचान ईशु के रूप में हुई। यह खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया।
ग्रेटर नोएडा के तालाब में पांच साल का लापता बच्चा मृत मिला (प्रतीकात्मक फोटो)
शव मिलने से मचा हड़कंप
इसी दौरान गांव के पास स्थित एक खुले तालाब में बच्चे का शव मिलने की खबर से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि तालाब के चारों ओर न तो घेराबंदी की गई थी और न ही किसी तरह के चेतावनी संकेत या रिफ्लेक्टर लगाए गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, पास में बस्ती होने के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए, जिसकी वजह से यह दुखद हादसा हुआ। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते तालाब को सुरक्षित कर दिया जाता, तो मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल
बताया जा रहा है कि, घटना की जानकारी मिलते ही बिसरख थाना पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और बच्चे के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि बच्चे की मौत के पीछे कोई अन्य वजह तो नहीं है। हालांकि शुरुआती जांच में मामला तालाब में डूबने का ही लग रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में मौजूद खुले तालाबों और अन्य जोखिम भरे स्थानों की जल्द से जल्द घेराबंदी कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों। इस हादसे ने प्रशासन की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
