Faridabad: ऐतिहासिक है सूरजकुंड झील, सूर्य को श्रद्धांजलि देने के लिए 10वीं सदी में हुआ निर्माण, जानें रोचक तथ्य

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  • Updated Aug 20, 2022, 12:22 PM IST

Faridabad: सूरजकुंड आज भले ही अपने हस्तशिल्प मेले के लिए प्रसिद्ध हो, लेकिन इसका इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका रहा है। सूरजकुंड 10 सदी से यहां के लोगों के पेयजल जरूरतों को पूरा करता आ रहा है। इस कुंड का निर्माण 10वीं सदी में तोमर कुल ने किया था। इस कुंड का उपयोग ब्रिटिश काल तक प्रमुख जलस्रोत के रूप में किया जाता रहा।

KEY HIGHLIGHTS
1. सूरजकुंड का निर्माण तोमर कुल ने 10वीं सदी में कराया 2. यह कुंड सूरज को समर्पित, देखने पर प्रतित होता उगता सूरज 3. ब्रिटिश काल तक यह कुंड बना रहा क्षेत्र के लिए प्रमुख जलस्रोत

Faridabad: फरीदाबाद के सूरजकुंड का नाम सुनते ही सामने प्रसिद्ध हस्तशिल्प मेले का रंगीन सा दृश्य उभर आता है। आज के समय में यह जगह इस मेले के कारण ही पूरे देश में प्रसिद्ध है। बहुत कम लोग हैं, जिन्हें पता है कि इस जगह के साथ कई सदियों का इतिहास जुड़ा है। आज हम आपको इसी इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस जगह पर यह प्रसिद्ध मेला लगता है, उसके ठीक पीछे सभागार जैसा एक बड़ा सा कुंड जलाशय बना है। करीब 6 एकड़ में फैले इस कुंड की चौड़ाई 130 मीटर है। इससे ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसके पूरे ढांचे को मिलाकर यह जलाशय कितना व्यापक है।

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हस्तशिल्प मेला ही नहीं, अपने इतिहास के लिए भी जाना जाता है सूरजकुंड

इतिहासकारों के अनुसार इस कुंड का निर्माण सूर्य को श्रद्धांजलि देने हेतु किया गया था। जिसके कारण ही कुंड के पूर्वी दिशा में ढलान बना हुआ है। अगर इस कुंड को दूर से देखा जाए तो यह उगते हुए सूर्य सा प्रतीत होता है। पहली बार इस सूरजकुंड को देखने पर खुले में चलने वाले किसी रोमन सभागार जैसा लगेगा। जहां पर चारों ओर पत्थरों की बड़ी-बड़ी सीढ़ियां बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों के बीचोबीच एक बड़ा सा खुला मैदान है। इस जलाशय के तरफ एक मंच जैसी संरचना बनाई गई है। यह मंच पुराने जमाने में राजाओं को बैठने के लिए हुआ करता था।

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