राजस्थान में ऑक्सीटोसिन साल्ट की कथित नकली दवा 'टोसिन' को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य सरकार की जांच में सामने आया है कि इस इंजेक्शन की सप्लाई केवल कोटा तक सीमित नहीं थी, बल्कि नई दिल्ली, इंदौर और उत्तर प्रदेश के गोंडा तक भी की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने संबंधित राज्यों को भी अलर्ट जारी कर दिया है।
नकली 'ऑक्सीटोसिन' इंजेक्शन का खुलासा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जैक्सन लैबोरेट्रीज पर होगी कार्रवाई
जांच के बाद राज्य सरकार ने टोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी जैक्सन लैबोरेट्रीज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है। वहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कोटा में इस दवा की सप्लाई राजस्थान मेडिकल हॉल के संचालक महेश मित्तल द्वारा की गई थी।
16 हजार इंजेक्शन मंगाए गए थे
जानकारी के अनुसार 23 फरवरी और 3 मार्च को कुल 16 हजार इंजेक्शन मंगाए गए थे। इनमें से करीब 10 हजार इंजेक्शन कोटा मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल भेजे गए, जबकि 2479 इंजेक्शन न्यू मेडिकल कॉलेज को सप्लाई किए गए थे। बाकी इंजेक्शन अन्य स्थानों पर वितरित किए गए।
पांच महिलाओं की मौत के बाद खुला मामला
मामला तब गंभीर हुआ जब प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत हो गई। इसके बाद एम्स दिल्ली की टीम जांच के लिए कोटा पहुंची। जांच टीम ने मृतक महिलाओं के इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं की गुणवत्ता जांचने की सलाह दी, जिसके बाद इंजेक्शन के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए।
प्रसव में इस्तेमाल होती है ऑक्सीटोसिन दवा
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल प्रसव को आसान बनाने और डिलीवरी के बाद होने वाले अत्यधिक ब्लीडिंग को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इंजेक्शन असर नहीं कर रहा था तो मरीज की स्थिति के अनुसार वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता था।
लापरवाही तय करेगी विशेषज्ञ समिति
पूरे मामले में मेडिकल लापरवाही या जिम्मेदारी तय करने का फैसला विशेषज्ञ जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा। फिलहाल दवा की सप्लाई चेन, क्वालिटी और इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।
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