Eid ul-Fitr 2026: दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद; जानें लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर की इस इमारत का इतिहास

रमजान के पवित्र महीने के समापन के साथ मुसलमान ईद की खुशियों में डूबने की तैयारियों में जुट जाते हैं। इस अवसर पर मस्जिदों में विशेष नमाज और घरों में सजावट का माहौल देखने को मिलता है। दिल्ली में इस त्यौहार पर बाजारों में रौनक और भी बढ़ जाती है, खासकर उस भव्य मस्जिद के आसपास जो आज भी शान से राजधानी की सरजमीं पर खड़ा है। ऐसे में आइए जानें इस मस्जिद का इतिहास।

Delhi Largest Mosque: रमजान का पाक महीना अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है और सभी मुसलमान ईद की खुशियों में डूबने की तैयारियों में व्यस्त हैं। इस महीने की रोजा और इबादत के बाद, ईद-उल-फितर का त्यौहार एक नई ऊर्जा और उल्लास लेकर आता है। ईद के दिन मुसलमान मस्जिद में विशेष नमाज अदा करते हैं, जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा, लोग अपने घर और मोहल्लों को सजाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और मिठाइयां और ईदी लेते-देते हैं। वहीं बात अगर राजधानी दिल्ली की करें तो यहां भी ईद-उल-फितर पर बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। खास तौर से उस जगह पर जहां दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद मौजूद है। ऐसे में आज हम आपको दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद के इतिहास से रूबरू करवाएंगे। तो आइए जानें इसके बारे में।

Delhi Largest Mosque

दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद

दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद- जामा मस्जिद

दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद

दिल्ली के पुरानी दिल्ली क्षेत्र में स्थित मस्जिद-ए-जहां-नुमा, जिसे आमतौर पर जामा मस्जिद के रूप में जाना जाता है, भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इसके निर्माता मुगल सम्राट शाहजहां थे, जिन्होंने 1644 और 1656 के बीच इसका निर्माण करवाया था और इसका उद्घाटन इसके पहले इमाम सैयद अब्दुल गफूर शाह बुखारी ने किया था। मुगल राजधानी शाहजहांनाबाद (आज पुरानी दिल्ली) में स्थित, इसने 1857 में साम्राज्य के पतन तक मुगल सम्राटों की शाही मस्जिद के रूप में कार्य किया। जामा मस्जिद को पूरे भारत में मुगल शक्ति के प्रतीकात्मक संकेत के रूप में माना जाता था। यह ब्रिटिश शासन के कई प्रमुख अवधियों के दौरान राजनीतिक महत्व का स्थल भी था।

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