आगामी शुक्रवार यानी 15 अगस्त को देश अपना 78वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इन दिनों जिधर भी जाओ सड़कों पर राष्ट्रध्वज लहराते हुए दिख रहे हैं। इस दौरान राष्ट्र भक्ति की भावना अपने चरम पर होती है। स्वतंत्रता दिवस का मुख्य कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित होता है, जिसमें प्रधानमंत्री राष्ट्रध्वज फहराते हैं। देश के किसी भी हिस्से में कोई साधारण व्यक्ति भी राष्ट्रध्वज फहरा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां पर सिर्फ प्रधानमंत्री ही ध्वज फहरा सकते हैं, कोई अन्य नहीं। चलिए जानते हैं -
यहां सिर्फ प्रधानमंत्री फहराते हैं राष्ट्रध्वज
1947 में देश के आजाद होने के बाद से अब तक हर साल देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर पर राष्ट्रध्वज फहराते आए हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण का मुख्य कार्यक्रम ऐतिहासिक लाल किले पर ही होता है। यहां इस दिन प्रधानमंत्री लाल किले के लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराते हैं। यह एक खास परंपरा है और यहां पर राष्ट्रध्वज फहराने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री को है।
गुलामी से लेकर आजादी तक की कई कहानियां लाल किले के लाहौरी गेट से जुड़ी हैं। इसका नाम मुगल गाल से जुड़ा है। लालकिले का निर्माण मुगलों ने ही करवाया था। उस समय यह गेट उस रास्ते की शुरुआत था, जो सीधे लाहौर (अब पाकिस्तान में) तक जाता था। इसीलिए इस गेट का नाम लाहौरी गेट पड़ा। मुगल काल में शाही जुलूस इसी रास्ते से जाते थे। उस समय यह गेट दिल्ली की शान और ताकत का प्रतीक था।
अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत पर राज किया था। साल 1857 में आजादी की पहली लड़ाई लड़ी गई थी। उस समय अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े हुए उस विद्रोह को कुचलने के बाद अंग्रेजों ने इसी लाहौरी गेट पर अपना यूनियन जैक फरहाया था। यह यूनियन जैक अगले करीब 90 वर्षों तक देश की गुलामी का प्रतीक बनकर लाहौरी गेट पर रहा। 1947 में देश के आजाद होने के बाद से आज तक यही लाहौरी गेट भारतीय स्वतंत्रता और सम्मान का प्रतीक बना हुआ है। यहां भारतीय तिरंगा बड़े ही गर्व से लहराता है।
नेताजी का सपना था लाहौरी गेट पर तिरंगा
बात 1943 की है, जब नेताजी सुभाष चंत्र बोस ने आजादी मिलने के बाद लालकिले पर INA ध्वज फहराने का सपना देखा था। उस समय नेताजी का सपना पूरा नहीं हो पाया, क्योंकि देश आजाद नहीं हुआ था। देश के आजाद होने पर 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाहौरी गेट पर राष्ट्रध्वज फहराया, जो आज भी शान से फहरा रहा है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रध्वज फहराने के साथ राष्ट्र को संबोधित भी किया था। आज भी वह परंपरा लगातार चली आ रही है।
देश के आजाद होने के बाद लाल किले के लाहौरी गेट पर राष्ट्रध्वज फहराने का सम्मान सिर्फ प्रधानमंत्री को मिला है। हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री यहां राष्ट्रध्वज फहराते हैं। इस समारोह के दौरान 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है।
