उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी जहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष की ओर से पीडीए, ब्राह्मण वोट और सत्ता विरोधी माहौल को चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर घेर रहा है। खासकर, राम मंदिर से जुड़े चंदे के विवाद, हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और नई पीढ़ी यानी ‘जेंजी’ के आंदोलनों ने यूपी की चुनावी बहस को और पेचीदा बना दिया है। टाइम्स नाउ नवभारत पर इन तमाम मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते हुए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दावा किया कि 2027 में बीजेपी 300 से अधिक सीटों के साथ सरकार बनाएगी।
बृजेश पाठक, डिप्टी सीए, उत्तर प्रदेश
चंदा चोरी पर बीजेपी का पलटवार
राम मंदिर से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा विपक्ष लगातार उठाता रहा है। इस पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी गठित की, एफआईआर दर्ज हुई और आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। उनका कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जारी है और सरकार निष्पक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी होगा। हालांकि, इसी मुद्दे पर बीजेपी नेता ने विपक्ष पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का हिसाब पूछा। उन्होंने कहा विपक्ष को इस पर भी बात करनी चाहिए।
हिंदू-मुस्लिम वोट बैंक की पुरानी राजनीति
यूपी की चुनावी राजनीति में मुस्लिम वोट लंबे समय से एक अहम फैक्टर रहा है। बीजेपी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी यादव और मुस्लिम वोटों के गठजोड़ के सहारे चुनाव लड़ती रही है। बृजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी किसी एक समुदाय के बजाय ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के आधार पर वोट मांगती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की योजनाओं का लाभ मुस्लिम समाज को भी मिल रहा है, लेकिन उसका राजनीतिक लाभ बीजेपी को अपेक्षित रूप से नहीं मिलता। हालांकि, सबसे ज्यादा पक्के मकान और आयुष्मान योजना का लाभ मुस्लिम समाज के लोग उठा रहे हैं।
दूसरी तरफ बीजेपी खुद सनातन संस्कृति और मंदिरों से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से रखती है। इंटरव्यू में विकास के साथ-साथ इतिहास और मुगल आक्रांताओं का जिक्र करने को भी सही ठहराया गया। यानी बीजेपी का चुनावी नैरेटिव विकास और सांस्कृतिक पहचान—दोनों को साथ लेकर चलने वाला दिखाई देता है।
दंगा मुक्त यूपी
उन्होंने जोर दिया कि सरकारी भूमि का उपयोग केवल सार्वजनिक कल्याण और विकास परियोजनाओं के लिए होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस पर अवैध कब्जा करता है, तो वह उसका दुरुपयोग करता है। डिप्टी सीएम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को माफिया-मुक्त, गुंडा-मुक्त, दंगा-मुक्त और कर्फ्यू-मुक्त बनाया गया है, जिसके कारण राज्य अब विकास की गति पर तेजी से बढ़ रहा है।
पीडीए बनाम बीजेपी का समीकरण
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के जवाब में बीजेपी ब्राह्मण समेत सर्वसमाज के समर्थन का दावा कर रही है। बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव के मंदिरों और ब्राह्मण सम्मेलनों को चुनावी रणनीति बताते हुए कहा कि केवल चुनाव के समय धार्मिक-सामाजिक समीकरण साधने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा है। लेकिन बीजेपी के सामने सिर्फ पारंपरिक जातीय समीकरणों की चुनौती नहीं है। एक और बड़ा सवाल नई पीढ़ी का है।
‘जेंजी’ आंदोलन और युवाओं की नाराजगी
इंटरव्यू में नई पीढ़ी और युवाओं के आंदोलनों को लेकर भी सवाल उठे। जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र करते हुए बीजेपी से पूछा गया कि क्या ऐसे आंदोलनों का असर 2027 के चुनाव में दिखाई दे सकता है। जवाब में बृजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी युवाओं के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं से सीधे संवाद किया है।
यहीं से यूपी की सियासत का नया सवाल सामने आता है। क्या सिर्फ जातीय और धार्मिक समीकरण 2027 की चुनावी लड़ाई तय करेंगे या नई पीढ़ी रोजगार, शिक्षा, भर्ती, परीक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी निर्णायक बनाएगी? इंटरव्यू में बीजेपी ने युवाओं की मांगों पर काम करने का भरोसा दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी युवाओं की नाराजगी को विपक्ष पहले ही राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी फिलहाल एकजुटता और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 300 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
