दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस पर बड़ी छूट, अब नहीं देना होगा मनमाना पानी-सीवर चार्ज; नई नीति कैसे करेगी काम

दिल्ली सरकार ने संपत्तियों पर जल शुल्क को कम करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की एक सरल नीति को मंजूरी दी है। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड के अवसंरचना शुल्क (आईएफसी) में बदलाव से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और लोगों को राहत मिलेगी।

दिल्ली में अब पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क को लेकर लोगों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। दिल्ली सरकार ने शुल्क प्रणाली को तर्कसंगत बनाते हुए नई नीति लागू करने का फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि अब लोगों से केवल उनकी वास्तविक जल आवश्यकता के आधार पर ही शुल्क लिया जाएगा, जबकि पहले पूरे प्रिमाइसेस के हिसाब से चार्ज वसूला जाता था। नई व्यवस्था के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस केवल नए निर्माण या अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होंगे। यानी यदि किसी भवन का पुनर्निर्माण किया जाता है और उसकी जल आवश्यकता पहले जैसी ही रहती है, तो दोबारा इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ ही नॉन-एफएआर और खुले क्षेत्र को भी शुल्क निर्धारण में शामिल नहीं किया जाएगा।

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सीएम रेखा गुप्ता (फोटो-@gupta_rekha)

सरकार ने अलग-अलग श्रेणी की कॉलोनियों को भी बड़ी राहत दी है। ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों में इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस पर 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों में 70 प्रतिशत तक राहत दी जाएगी। यह शुल्क केवल 200 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड क्षेत्र वाली संपत्तियों पर लागू होगा। अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भी नई नीति से फायदा मिलेगा। अब पंजीकृत वास्तुकार द्वारा अनुमोदित नक्शों को मान्यता दी जाएगी, जिससे लोगों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

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