ट्रांसपोर्टर निकाय एआईएमटीसी ने दिल्ली-एनसीआर में 21 मई से तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल वाणिज्यिक वाहनों पर बढ़ाए गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति अधिभार (ईसीसी) और बीएस-4 या उससे पुराने वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के विरोध में की जा रही है।
ऑटो (फोटो-IstOck)
अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि उसके बैनर तले दिल्ली-एनसीआर के 68 से अधिक ट्रांसपोर्ट संगठन तीन दिनों तक अपने परिचालन बंद रखेंगे। यह निकाय देशभर में 95 लाख ट्रक चालकों और 26 लाख निजी बस, टैक्सी और मैक्सी कैब संचालकों के साथ विभिन्न राज्य स्तरीय परिवहन संगठनों के प्रतिनिधित्व का भी दावा करता है।
एआईएमटीसी ने आरोप लगाया कि यह हड़ताल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), अदालतों और दिल्ली सरकार की अनुचित नीतियों के विरोध में बुलाई जा रही है। उसने कहा कि परिवहन संबंधी नीतियों में वैज्ञानिक एवं कानूनी आधार का अभाव है।
'ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ ने एलजी और सीएम को लिखा पत्र
'ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखीं। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा, ’’सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण चालक अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसलिए, दिल्ली के अन्य संगठनों के समन्वय से चालक शक्ति यूनियन ने 21, 22 और 23 मई को चक्का जाम का आह्वान किया है और इन दिनों वाहन न चलाने की अपील की है।
प्रदूषण नियामक सीएक्यूएम ने दिया है ये प्रस्ताव
केंद्र सरकार के प्रदूषण नियामक सीएक्यूएम ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए एक नवंबर से बीएस-4 और उससे पुराने वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने हाल ही में ईसीसी में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है और हर साल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान किया है।
ट्रांसपोर्टर निकाय ने कहा कि इन नीतिगत फैसलों का परिवहन क्षेत्र और इससे जुड़े लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। संगठन का दावा है कि ईसीसी सभी वाहनों पर समान रूप से लगाया जा रहा है, जिसमें बीएस-4 और आवश्यक वस्तुएं ढोने वाले वाहन भी शामिल हैं।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समय पर इस मुद्दे का समाधान नहीं निकला तो यह प्रतीकात्मक हड़ताल आगे चलकर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अनिश्चितकालीन परिवहन बंदी में भी बदल सकती है। एआईएमटीसी ने कहा कि आवश्यक वस्तुएं ढोने वाले बीएस-4 वाहनों के साथ खाली वाहनों को भी ईसीसी से छूट दी जानी चाहिए।
15 वर्षों से किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं - यूनियन
टैक्सी किराए में बढ़ोतरी की मांग तेज हो गई है। टैक्सी यूनियनों का कहना है कि दिल्ली में पिछले करीब 15 वर्षों से किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया, जबकि इस दौरान ईंधन, मेंटेनेंस और वाहन संचालन का खर्च कई गुना बढ़ चुका है। यूनियनों ने ऐप आधारित कैब कंपनियों पर मनमाने किराए और ड्राइवरों के शोषण का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा किराया ढांचा ड्राइवरों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को टैक्सी और ऑटो चालकों की समस्याओं पर विचार कर किराया संशोधन को लेकर कदम उठाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इसी मुद्दे को लेकर 23 मई को दिल्ली सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा भी की गई है।
इधर, सीएनजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने टैक्सी और ऑटो चालकों की चिंता और बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में सीएनजी के दाम में कुल 3 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है और कीमत 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन खर्च का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ रहा है, इसलिए किराए में संशोधन अब जरूरी हो गया है।
