राजधानी दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक 'दिल्ली रेस क्लब' का 100 साल पुराना सफर अचानक नाटकीय मोड़ पर आकर समाप्त हो गया है।
रक्षाबंधन पर राहुल गांधी के पास पहुंचीं बीआर कैंप की महिलाएं
केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय ने कार्रवाई करते हुए लोक कल्याण मार्ग पर बने 53 एकड़ के इस विशाल परिसर का पूर्ण कब्जा ले लिया है। कब्जे की प्रक्रिया पूरी होते ही परिसर के भीतर बनी इमारतों और बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने का काम शुरू कर दिया गया। इसी बीच, रेस कोर्स के पास स्थित बीआर कैंप (BR Camp) की रहने वाली महिलाएं रक्षाबंधन के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने कांग्रेस मुख्यालय पहुंचीं।
महिलाओं का कहना था कि रेस क्लब प्रशासन की कार्रवाई से उनके आशियानों पर भी संकट मंडरा रहा है और उन्हें डेढ़ महीने में जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। महिलाओं ने राहुल गांधी से पास में ही वैकल्पिक मकान दिलाने की अपील की है। कानून और प्रशासन के इस कड़े कदम से लुटियंस दिल्ली का यह ऐतिहासिक अध्याय अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है।
पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के बाद एक्शन
यह पूरी प्रशासनिक कार्रवाई पटियाला हाउस अदालत के उस फैसले के बाद हुई, जिसमें कोर्ट ने क्लब की अंतरिम रोक वाली अर्जी को खारिज कर दिया था। क्लब प्रबंधन ने बेदखली के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन राहत न मिलने पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। बुलडोजर ने क्लब के कई ऐतिहासिक ढांचे जैसे अस्तबल, विनिंग पोस्ट, बुकमेकर्स रिंग, सैडलिंग एनक्लोजर और फोटो-फिनिश कैमरा रूम को गिरा दिया।
कार्रवाई से रेस क्लब से जुड़े लोगों और घोड़ों के मालिकों में भारी निराशा
इस अचानक हुई कार्रवाई से रेस क्लब से जुड़े लोगों और घोड़ों के मालिकों में भारी निराशा है। परिसर में करीब 250 महंगे और बेहतरीन नस्ल के थोरब्रेड (Thoroughbred) घोड़े मौजूद थे, जिनकी कीमत 3 लाख से 50 लाख रुपये तक है। लगभग 200 घोड़ों को उनके मालिक वापस ले चुके हैं, जबकि बचे हुए घोड़ों को देश के अन्य रेसिंग सेंटरों में सुरक्षित भेजा जा रहा है। खाली करने के लिए 14 सितंबर तक का समय तय किया गया है।
