Stalled Wheels Of Justice: अतुल सुभाष जैसे मामले क्यों होते हैं? कई मुकदमों के हवाले से समझाती है ये किताब

StalledWheelsOfJustice: पत्रकार और रिसर्च स्कॉलर शिशिर त्रिपाठी की इस किताब में कई ऐसे मामलों को दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय कानूनी प्रक्रिया की लचर अवस्था को दिखाया गया है। हाल में हुए अतुल सुभाष जैसे मामले भी इसी लचर कानूनी प्रक्रिया की देन हैं।


दिल्ली: सॉफ्ट-वेयर इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद देश में न्यायिक प्रक्रिया के लचर व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। दरअसल कई बार लंबी कानूनी प्रक्रिया में पीड़ित तक न्याय इतनी देर से पहुंचता है कि वह औचित्यविहीन हो जाता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 2019 में इस संदर्भ में कहा था-मैं, सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका का सम्मान करता हूं, मगर कई विचाराधीन मसलों पर, कोर्ट का फैसला बड़ी देरी से आता है.... फैसला लेने में हो रही देरी कई मुश्किलें खड़ी करती हैं...’.

Stalled WheelsOf Justice

StalledWheelsOfJustice

पत्रकार और रिसर्च स्कॉलर शिशिर त्रिपाठी की किताब StalledWheelsOfJustice बहुत सधे हुए अंदाज में न्याय के बीच में आ रही बाधाओं पर चर्चा की है। यह किताब लंबित मामलों की अंतहीन सूची, केस मजबूत बनाने के लिए कानून के दुरुपयोग, न्यायिक बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति और कानूनी पहुंच की वित्तीय लागत पर रोशनी डालती है।

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