राजस्थान में भले ही छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगी हुई है, लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं का उत्साह दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में देखने को मिल रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनावों में इस बार राजस्थान के कई नेताओं ने खुलकर अपने-अपने छात्र संगठनों के प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी संभाली है।
चुनाव में दिग्गजों की एंट्री
राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित प्रदेशभर के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे। पिछली गहलोत सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के तर्क के साथ चुनावों पर रोक लगा दी थी। ऐसे में प्रदेश की छात्र राजनीति काफी हद तक ठंडी पड़ गई है। लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी में होने वाले चुनावों में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर राजस्थान के नेताओं की सक्रियता पर भी दिखाई दे रहा है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रत्याशियों के समर्थन में राजस्थान से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल पहुंचे। इन नेताओं नेताओं ने छात्र कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उन्हें चुनावी रणनीति को लेकर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे छात्र हितों और राष्ट्रवादी सोच को आगे ले जाने के लिए एबीवीपी प्रत्याशियों को जिताएं।
वहीं, कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रत्याशियों को समर्थन देने दिल्ली पहुंचे पूर्व उपमुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट। पायलट ने डीयू के विभिन्न कॉलेज परिसरों में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं से संवाद किया और कहा कि यह चुनाव सिर्फ छात्र राजनीति नहीं बल्कि देश की आने वाली राजनीति का आइना है। पायलट ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि एनएसयूआई हमेशा छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाएगी।
राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों पर लगी रोक को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे चुनावों में नेताओं की सक्रियता उनकी भविष्य की राजनीतिक जमीन मजबूत करने का हिस्सा है। यहां के चुनाव न केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनते हैं बल्कि आने वाले समय में नई राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की भी प्रयोगशाला साबित होते हैं। इस बार डीयू चुनाव में राजस्थान की मौजूदगी और नेताओं की सक्रियता ने प्रदेश की छात्र राजनीति को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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