Delhi Latest News: भीषण वायु प्रदूषण की मार झेलने वाले दिल्ली शहर में जीवन के अनुमानित समयकाल यानी Life Expectancy में 11.9 साल की आश्चर्यजनक कमी आ रही है। यह खुलासा हाल ही में एक ताजा स्टडी के जरिए हुआ है। शोध के हवाले से समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2021 के पीएम 2.5 डेटा के आधार पर हुए शोध से पता चला कि भारत में प्रदूषण 2020 में हवा के 56.2 µg/m3 से बढ़कर 2021 में 58.7 µg/m3 हो गया।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हवा के दिशानिर्देश से 10 गुना से अधिक है। ऐसे में हिंदुस्तान के सभी 130 करोड़ लोग उन क्षेत्रों में रहते हैं, जहां सालाना औसत कण प्रदूषण स्तर (Annual Average Particulate Pollution Level) है। लगभग 67.4 फीसदी भारतीय आबादी ऐसे इलाकों में रहती है, जो कि देश के अपने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 µg/m3 वायु से अधिक है।
साल 2021 में दिल्ली का सालाना औसत पीएम 2.5 स्तर वायु का 126.5 µg/m3 पाया गया था, जो कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन (वायु का पांच µg/m3) 25 गुणा अधिक है। वैसे, 2020 में इस आंकड़े में थोड़ी सी गिरावट आई थी और यह वायु के 107 µg/m3 पर मापा गया था।
स्टडी में कहा गया था कि अगर इंडिया को डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप कणीय प्रदूषण को कम करना होता, तो दिल्ली के निवासियों की जीवन प्रत्याशा 11.9 वर्ष बढ़ जाती। उत्तर 24 परगना (जो देश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला जिला है) में निवासियों को 5.6 साल की जीवन प्रत्याशा हासिल होगी।
आगे जीवन प्रत्याशा को मापते हुए शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि कण प्रदूषण (PM2.5) भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह औसत भारतीय के जीवन से 5.3 साल छीन लेता है। वहीं, दिल से जुड़ी बीमारियों से औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा लगभग 4.5 वर्ष कम हो जाती है और बाल और मातृ कुपोषण से जीवन प्रत्याशा 1.8 वर्ष कम हो जाती है।
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