दिल्ली में कभी नहीं लड़ा विधानसभा चुनाव, फिर भी बनीं मुख्यमंत्री; पड़ोसी राज्य में शिक्षामंत्री भी रहीं

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी को पहली और अब तक आखिरी बार 1993 में जीत मिली थी। दिल्ली में भाजपा की आखिरी मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज थीं, जिन्होंने कभी भी दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। वह मात्र 51 दिन मुख्यमंत्री रहीं। जबकि दिल्ली के पड़ोसी राज्य में वह विधायक भी रहीं और शिक्षा मंत्री भी।

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के तहत प्रचार जोरों पर है। दिल्ली की सभी 70 सीटों पर एक ही चरण में 5 फरवरी को मतदान होगा। चुनाव का परिणाम शनिवार 8 फरवरी को सामने आएगा। दिल्ली का चुनावी इतिहास बहुत ही रोचक रहा है। 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद दूसरा विधानसभा चुनाव 1993 में हुआ। इसके अलावा दिल्ली में मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल हो या चुनाव प्रचार का अनोखा तरीका। ‘दिल्ली का चुनावी रंग, इतिहास के पन्नों में’ बड़ा ही रंगीन है। आज हम बात कर रहे हैं दिल्ली की एक ऐसी मुख्यमंत्री की, जो पहले हरियाणा में शिक्षा मंत्री रहीं और बाद में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं।

Sushma Swaja Delhi CM.

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं सुषमा स्वराज

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री

दिल्ली को अपनी पहली महिला मुख्यमंत्री के लिए ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना पड़ा। साल 1952 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद कांग्रेस ने जहां ब्रह्म प्रकाश को मुख्यमंत्री बनाया, वहीं उन्हें हटाकर बाद में गुरमुख सिंह निहाल को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 1956 में विधानसभा भंग हुई और 1993 में भाजपा को बहुमत मिलने पर पहले मदन लाल खुराना को मुख्यमंत्री बनाया गया और बाद में उन्हें हटाकर साहिब सिंह वर्मा मुख्यमंत्री बने। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले साहिब सिंह वर्मा को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभाली सुषमा स्वराज ने। जी हां, सुषमा स्वराज ही दिल्ली की पहली मुख्यमंत्री रहीं।

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