Delhi Tree Collapse: दिल्ली के कालकाजी में भारी बारिश के दौरान एक पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की दुखद मौत हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, नई दिल्ली में तेज आंधी और वर्षा के समय पेड़ों के गिरने का मुख्य कारण कंक्रीटीकरण है। उन्होंने बताया कि फुटपाथ और सड़क के बीच के हिस्से को कंक्रीट से ढकने से पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुँचता है, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती है और पानी व ऑक्सीजन की पहुँच कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पेड़ कमजोर हो जाते हैं और उनकी छाल काली पड़ने लगती है, जो पोषक तत्वों की कमी का संकेत है।
दिल्ली में पेड़ गिरने से हुई मौत के बाद विशेषज्ञों का बयान (सांकेतिक फोटो: Canva)
प्रो. सी.आर. बाबू, जो बायोडायवर्सिटी पार्क परियोजना के प्रभारी हैं, ने बताया कि भूजल स्तर में गिरावट और कंक्रीटीकरण ने पेड़ों की जड़ों को और कमजोर कर दिया है। पेड़ की जड़ें उतनी ही फैलती हैं जितनी उनकी छतरी, लेकिन कंक्रीट पानी को जड़ों तक पहुँचने से रोकता है। ग्रीनपीस इंडिया के आकिज़ फ़ारूक़ ने कहा कि सड़क किनारे के पेड़, जिनकी जड़ें कंक्रीट में दबी होती हैं, अधिकतर गिरते हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि पेड़ों की जड़ों को विकसित होने के लिए ढीली मिट्टी की आवश्यकता होती है, लेकिन कंक्रीट की स्लैब इस प्रक्रिया में बाधा डालती हैं। मानसून के दौरान यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। 2013 में एनजीटी के आदेश के बावजूद, दिल्ली में पेड़ों के चारों ओर से कंक्रीट हटाने का कार्य अभी तक अधूरा है और पेड़ों की सही संख्या का आकलन भी नहीं किया गया है।
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