दिल्ली : ऑनलाइन गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मूल रूप से अमेरिकी सरकार द्वारा विकसित किया गया टूल ‘टोर ब्राउजर’ अब भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है क्योंकि साइबर अपराधी बम की धमकियां भेजने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि दुनिया भर में एन्क्रिप्शन और सर्वर की कई परतों के माध्यम से इंटरनेट उपयोगकर्ता की पहचान छुपाने वाला यह ब्राउजर हाल के महीनों में खुद को ‘टेरराइजर्स 111’ कहने वाले एक साइबर समूह द्वारा बार-बार इस्तेमाल किया गया है।
दिल्ली पुलिस (फाइल फोटो-@DelhiPolice)
टोर ब्राउजर का क्या है काम?
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पत्रकारों और कार्यकर्ताओं द्वारा गोपनीयता एवं निगरानी से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले टोर ब्राउजर का अब साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है।
न्यूज एजेंसी भाषा के हवाले से अधिकारी ने बताया कि इस समूह ने इस साल अगस्त से अब तक कई शहरों के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों को कथित तौर पर ईमेल के जरिये कई धमकियां भेजीं, जिससे व्यापक दहशत फैल गई और बड़े पैमाने पर सुरक्षा जांच की आवश्यकता पड़ी।
इनमें से ज्यादातर सूचनाएं झूठी साबित हुई हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इनसे काफी दिक्कतें हुईं, जिसके कारण लोगों को जगह खाली करनी पड़ीं, बम निरोधक दस्ते तैनात करने पड़े और बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाने पड़े। अधिकारी ने कहा कि इन ईमेल के साथ चुनौती यह है कि ये टोर नेटवर्क के जरिए भेजे जाते हैं, जिससे मूल प्रेषक का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
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