बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया और डेंगू पर काबू पाने का प्रयास, नगर निगम ने ऐसे किया मच्छर नियंत्रण का कार्य

दिल्ली में यमुना का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम ने मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है। यह कदम बाढ़ प्रभावित इलाकों में रोगों की रोकथाम के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Delhi News: दिल्ली में यमुना का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर जनित बीमारियों, जैसे डेंगू और मलेरिया, का खतरा बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने ड्रोन का उपयोग करने का निर्णय लिया है ताकि मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित किया जा सके। बाढ़ के कारण कीचड़ में मच्छर रोधी दवाओं का पारंपरिक छिड़काव कठिन हो रहा है, इसलिए ड्रोन से छिड़काव किया जा रहा है। यह नगर निगम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन का दूसरा प्रयोग है; इससे पहले कोरोना महामारी के दौरान ड्रोन का उपयोग सैनिटाइजेशन के लिए किया गया था।

दिल्ली में डेंगू का प्रकोप, मच्छरों पर काबू पाने के लिए MCD ने अपनाया अनोखा तरीका

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नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार गढ़ी मेंढू गांव, यमुना बाजार, वासुदेव घाट, अशोक नगर और सोनिया विहार जैसे यमुना के किनारे बसे इलाकों में मच्छरों का प्रजनन अधिक होने की संभावना है। फिलहाल केवल एक ड्रोन इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 136 कर्मचारियों की विशेष टीम तैनात की गई है। अब तक 1346 स्थानों पर मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया गया और 4329 बाढ़ प्रभावित घरों में फॉगिंग की गई। 6 सितंबर तक की रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया के 264, डेंगू के 557 और चिकनगुनिया के 42 मामले सामने आए हैं, लेकिन इन बीमारियों से किसी की मौत नहीं हुई है।

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