दिल्ली में सांस लेना मुश्किल, लगातार 15 दिन AQI ‘बहुत खराब’; आगे भी राहत की उम्मीद नहीं

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नवंबर के दौरान प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है और वायु गुणवत्ता 15 दिनों से ‘बहुत खराब’ श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाई है। कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच चुका है, जिससे हालात और चिंताजनक हो गए हैं। मौसम विभाग और विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है।

Delhi News: नवंबर महीने में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार 15 दिनों तक वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही है और विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सप्ताह में भी दिल्लीवासियों को इससे राहत मिलने की संभावना कम है। शुक्रवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 369 दर्ज किया गया। इससे पहले गुरुवार को यह 377, बुधवार को 327, मंगलवार को 352 और सोमवार को 382 रहा था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ‘समीर’ ऐप के मुताबिक, द्वारका सेक्टर-8 में सबसे अधिक 414 का AQI रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दिनों में भी प्रदूषण का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने की प्रबल संभावना है।

Delhi Air Quality Remains Severe for 15 Days (Photo: PTI)

दिल्ली की वायु गुणवत्ता नवंबर में 15 दिन ‘बेहद खराब' (फोटो: पीटीआई)

AQI का स्तर 400 के पार

‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, आरके पुरम, पंजाबी बाग, नेहरू नगर, द्वारका, रोहिणी, जहांगीरपुरी और मुंडका सहित कई स्टेशनों पर एक्यूआई का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया गया। सुबह के शुरुआती समय में 39 मॉनिटरिंग केंद्रों में से 18 पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पाई गई। सीपीसीबी की श्रेणियों के मुताबिक, 0-50 तक का एक्यूआई ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 के स्तर को ‘गंभीर’ माना जाता है। पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के अनुमान के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत रही। वहीं आसपास के क्षेत्रों में यह योगदान सोनीपत में 8.7 प्रतिशत, करनाल में 3.9 प्रतिशत और पानीपत में 6.9 प्रतिशत आंका गया। संस्थान का यह भी कहना है कि प्रदूषण में पराली जलाने का प्रभाव लगभग 1.2 प्रतिशत रहा।

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